जयपुर, दो मई। राष्ट्रीय बाल कल्याण पुरस्कार २००७ के लिए १५ मई ०७ से पहले प्रविष्टियां आमंत्रित की गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक ने इस सम्बन्ध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्रा लिख कर अनुरोध किया है कि वे उनके जिले में बाल कल्याण एवं विकास के क्षेत्रा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्था एवं व्यक्तियों के आवेदन पत्रा संस्था द्वारा किये गये कार्यों, अर्जित पलब्धियों एवं जिला कलेक्टर की अभिशंषा सहित १५ मई से पहले भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को भिजवाए। पत्रा में यह भी उल्लेख है कि जिले से एक ही संस्था एवं व्यक्ति के आवेदन पत्रा भिजवाया जाय। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों के कल्याण एवं विकास के क्षेत्रा में स्वैच्छिक सेवा भावना को राष्ट्रीय पहचान प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष १९७९ से राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु प्रति वर्ष प्रतिष्ठित स्वैच्छिक संगठनों एवं व्यक्तियों को राष्ट्रीय स्तर पर चुना जाकर क्रमशः ३ लाख एवं एक लाख रुपये, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्रा देकर सम्मानित किया जाता है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किये जायेंगे।
प्राविधिक शिक्षा निदेशक श्री आई. आर. त्रिवेदी ने प्रारंभ में स्लाइड-प्रोजेक्टर के माध्यम से पूरे राज्य के प्राविधिक शिक्षा की वर्तमान योजनाओं व प्रगति की विस्तृत कार्यप्रणाली की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप योजना के तहत निदेशालय ने राज्य में एक दर्जन संस्थानों को नए शैक्षणिक सत्र से प्रवेश की अनुमति दी है। इनमें से दस को निःशुल्क भूखण्ड आवंटित कर दिए गए है। बैठक में राज्य के सभी राजकीय पोलोटेक्निक के प्राचार्यो ने भाग लिया।