बीकानेर, सर्व शिक्षा अभियान में प्रतिनियुक्त पर कार्यरत कार्मिको को न मुल परियोजना में काम करने के लिए अब दूबारा साक्षात्कार देना पडेगा। इस कार्य के लिए राज्य सरकार के लगभग 10 से 11 करोड रूपये खर्च आयेगा। एक तरफ जहां सरकार पूरे राज्य को अकाल का सामना कर रही है वही दूसरी और इस प्रकार की योजना में पैसा खर्च किया जा रहा है। जो पूर्ण ओचित्य नहीं क्योकि कर्मचारी को प्रतिनियुक्त से अपने मूल स्थान पर जाने के लिए दूबारा साक्षात्कार देने पडेगा। हाल में सर्व शिक्षा में प्रति नियुक्ती में राज्य भर में 33 एडीपीसी व 9 डिप्टी डायेक्टर 144 व्याख्याता 99 पीए व 711 आर पी 3100 के लगभग सीआरसीएफ 33 एईएन 270 जेईएन 33 युडीसी 270 एलडीसी 270 जुनियर एकाउण्टेड व 33 एएओ को पीएल व टीएडीए का लाभ देने से सर्व शिक्षा के लगभग 10 से 11 करोड रूपये खर्च हो यह सही नहीं है। क्योकि मार्च 2010 तक इन पदो पर प्रतिनियुक्ती उधर राजस्थान पारमिभक शिक्षा परिषद ने सर्व शिक्षा में लोक जुम्बिश व न्यायालय से स्टे वाले पदों पर शेष सभी पदो को रिक्त मान लिया है। परियोजना में अब तक चयन साल के लिए शिक्षकों व्याख्याताओं और शिक्षा अधिकारियों का चयन किया जाता है। चार साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें वापिस अपने मूल विभाग में भेज दिया जाता है तथा उन्ही पदों को वापस भरने के लिए वापस से साक्षातत्कार प्रक्रिया निभायी जाती है। राज्य सरकार के निर्देश पर परिषद ने सभी पदो को रिक्त मानते हुए साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे विभाग को 10 व 11 करोड रूपये का व्यर्थ खर्च झेलना पडेगा।