बीकानेर, ग्रामीण परीवेश प्रकृति की निराली छटा तथा वृद्धा की सिकंद देखकर ऐसा अभिभूत होता है की यह अभी अपने भाव बताकर अपनी पीडा को व्यक्त कर देगी, चित्रों में दर्शायें भाव भीगमय हृदय को टच करने वाली है। ये उद्गार राज परिवार को सदस्या पद्मा कुमारी ने जूनागढ में डॉ अजीत सिंह राठौड द्वारा लगाई गई, तीन दिवसीय चित्र प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर व्यक्त किये। उन्होनें कहा कि राठौड ने जो चित्र बनाये है उनमें रंगो का समावेश बखूबी किया गया है। तथा कलाकार ने अपनी कल्पना को बखूबी चित्रों में उकेरकर संजीवता प्रधान की है। विद्यायिका सिद्धी कुमारी ने नारी वेदना को चित्रों के जरीये दिखाएं भावों को कलाकार की मातृत्व सोच का परिणाम बताया। इस अवसर पर अतिथियों का डॉ अजीत सिहं राठौड, डॉ पुष्पेन्द्र शेखावत, भंवरलाल डागा आदि ने स्वागत किया। प्रदर्शनी में सत्तर चित्रों को लगाया गया है।