जयपुर। प्रदेश के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र के पशु पालकों को पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा पशु चिकित्सालय पशु पालक के द्वार योजना एक अगस्त से पूरे राज्य में लागू हो गई है। इस योजना के तहत लगभग 200 पशु चिकित्सा शिविरों का प्रतिदिन आयोजन होगा। प्रत्येक शिविर में 100-150 पशुओ की चिकित्सा की जाएगी।
पशुपालन निदेशक डॉ. राजेश शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में राज्य में 9 हजार 186 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें 3 हजार 595 विभागीय संस्थाओं एवं 300 जे.के.ट्रस्ट द्वारा संचालित समन्वित विकास केन्द्रों पर विभागीय सुविधाएं उपलब्ध है, शेष लगभग 5 हजार 291 ग्राम पंचायतें, जहां पर पशु पालन विभाग की कोई संस्था कार्यरत नहीं है। उनमें प्रतिमाह एक पशु चिकित्सक शिविर एवं गोष्ठियां आयोजित की जाएगी। जिसमें ग्राम पंचायत क्षेत्र के साथ-साथ आस-पास के राजस्व गांवों के पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान सुविधा, रोगी पशुओं का उपचार, बांझ पशुओं का निदान व उपचार, टीकाकरण, बधियाकरण एवं गोष्ठियों के माध्यम से उन्नत तकनीक का ज्ञान एवं पशुपालन गतिविधियों की जानकारी आदि सुविधाएं पशुपालकों को सुलभ कराई जाएगी। इस प्रकार 5 हजार 291 ग्राम पंचायतों में प्रतिमाह पशु चिकित्सा शिविर आयोजत कर प्रति वर्ष एक करोड पशुओं को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।