बीकानेर, जंगे आजादी में बीकानेर में स्वाधीनता आंदोलन की अलख जगाने में अहम भूमिका निभाने वाले वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामनारायण शर्मा का आज अपराह्न पी.बी.एम. अस्पताल में निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। वे अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी कमला देवी, छः पुत्र व दो पुत्रियों सहित भरापूरा परिवार छोड गये हैं। उनके निधन से बीकानेर ही नहीं समूचे राजस्थान में शोक छा गया है। पारिपारिवक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कल सुबह 9.00 बजे स्थानीय सारस्वत श्मशान गृह, रांकावत भवन के पीछे, जस्सूसर गेट में किया जायेगा। कूल्हे की हड्डी टूट जाने के कारण शर्माजी पिछले एक-डेढ साल से लगातार अस्वस्थ चल रहे थे। एक माह पूर्व ही उनका पूर्व का पेशमेकर बदलकर नया पेशमेकर लगाया गया। शनिवार सुबह अचानक उन्हें सांस में तकलीफ हुई जिसके कारण उन्हें पी.बी.एम. अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अपराह्न 3.00 बजे अंतिम सांस लिया।
हालांकि पी.बी.एम. का चिकित्सकीय स्टाफ पी.बी.एम. अधीक्षक डॉ. विनोद बिहाणी व डॉ. एन.के. सोनी के निर्देशन में शर्माजी के स्वास्थ्य लाभ के लिए लगा हुआ था, लेकिन वे शर्माजी को बचा नहीं पाये।
सबसे पहले फहराया तिरंगा
रामनारायणजी शर्मा के नेतृत्व में सर्वप्रथम वेदों के चौक में भारतीय तिरंगा फहराया गया। शर्माजी अनेक बार जंगे आजादी के लिए जेल गये और यातनाएं सहन की। तत्कालीन प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर आपको शहर निकाला भी सहन करना पडा। शर्माजी के सार्वजनिक जीवन की शुरूआत प्रजामंडल से हुई। उन्हें केन्द्र सरकार व राज्य सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुका है, इसके अतिरिक्त राजस्थान पत्रकार संघ जार ने लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से भी इन्हें नवाजा। आप नगर परिषद में दो बार निर्वाचित हुए और परिषद की आर्थिक समिति के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित किया।