राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत हुई हर्षिता डामोर की परियोजना
4 Jan
2008 शहर की राजकीय देवेन्द्र बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा हर्षिता डामोर के दल द्वारा जैव विविधता पर तैयार की गई परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुतिकरण दिया गया।
डूंगरपुर 4 जनवरी/ शहर की राजकीय देवेन्द्र बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा हर्षिता डामोर के दल द्वारा जैव विविधता पर तैयार की गई परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुतिकरण दिया गया।
विद्यालय की प्रधानाचार्य देवी जोशी ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभााग द्वारा बाल वैज्ञानिका को प्रोत्साहित करने के लिए गत दिनों महाराष्ट्र के पुणे जिले के विद्या प्रतिष्ठान बारामती में आयोजित हुई बाल विज्ञान कांग्रेस में विद्यालय की छात्रा हर्षिता डामोर ने नौ देशों के एक हजार बाल वैज्ञानिकों के साथ अपनी परियोजना प्रस्तुत कर जिले का नाम रोशन किया है। निवर्तमान राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा उद्घाटित इस आयोजन में हर्षिता ने विद्यालय की रसायन विज्ञान प्राध्यापक वंदना सोलोमन के मार्गदर्शन में ‘वट वृक्ष पर आश्रित जैव विविधता’ विषय पर अपनी परियोजना प्रस्तुत की। इस आयोजन में राजस्थान से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
उल्लेखनीय है कि गत फ् से भ् दिसंबर को जयपुर में प्रस्तुत की गई त्त्ख् परियोजनाओं में से जूनियर वर्ग की श्रेष्ठ पन्द्रह परियोजनाओं में इस परियोजना का चयन किया गया था। विद्यालय की हर्षिता डामोर एवं नाजिया खान, अंजु पाण्डेय, अनिता रोत व फरहीन मकरानी के दल द्वारा तैयार इस परियोजना में डूंगरपुर नगरपालिका क्षेत्र में वट वृक्षों पर पाई जाने वाली जैव विविधता के बारे में विस्तार से अध्ययन किया गया है। इसमें बताया गया है कि वर्तमान में डूंगरपुर नगरपालिका क्षेत्र में वट वृक्ष अवस्थित हैं जिसमें से वृक्ष लगभग एक सौ वर्ष से ज्यादा उम्र के है। इनमें से दो वृक्ष ही मात्र संरक्षित है अन्य को संरक्षण की त्वरित आवश्यकता है। परियोजना के तहत प्रत्येक वट वृक्ष पर आश्रित जीवों के बारे में छात्राओं द्वारा विस्तृत अध्ययन के उपरान्त पाया गया कि इन पर फ्म् प्रजातियों के जीव भोजन, सुरक्षा व आवास के लिए पाए जाते हैं। ये जीव हानिकारक जीवों को नष्ट कर परागण तथा प्रकीर्णन कर वृक्ष के अस्तित्व को बनाए रखने में भी उपयोगी साबित होते हैं।
परियोजना में यह भी बताया गया है कि विशाल वट वृक्ष वायु, जल,मृदा, जलवायु का संरक्षण कर तथा प्रदूषण पर नियंत्रण कर पर्यावरण को संतुलित करने में सहयोग प्रदान करते हैं वहीं आयुर्वेद चिकित्सा की दृष्टि से भी इस वृक्ष का बेहद महत्त्व है।