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विराट ब्रह्मावर्चस् महानुष्ठान मे मेवाड़-वाग़ड और गुजरात-मध्यप्रदेश के संभागी आएंगे
4 Jan 2008

गायत्री मंत्र् के एक करोड़ जाप होंगे, विशिष्ट अनुष्ठान


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बांसवाडा 4 जनवरी/धर्म परिषद की ओर से बांसवाडा शहर के कुशलबाग मैदान में  जनवरी रविवार को आयोजित होने जा रहे विराट ब्रह्मावर्चस् महानुष्ठान के अन्तर्गत विश्वविख्यात अध्यात्म विभूति ध्यानयोगी उत्तम स्वामीजी महाराज के सान्निध्य में मेवाड़, वाग़ड सहित मध्यप्रदेश और गुजरात आदि राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रें से पांच हजार से अधिक साधक ब्राह्माण हिस्सा लेंगे।
महानुष्ठान के संयोजक ब्रह्मार्षि पं. दिव्यभारत पण्ड्या ने बताया कि बांसवाडा के इतिहास में पहली बार लोक मंगल की कामना से होने जा रहे इस महानुष्ठान में सर्वजातीय ब्राह्माण हिस्सा लेंगे।
इस अनुष्ठान के दौरान् वेदों की ऋचाओं, पौराणिक श्लोकों और कर्मकाण्ड तथा विभिन्न साधना पद्घतियों के मंत्रें और यंत्रें की विभिन्न गतिविधियों से मैदान गूंजेगा। पुरातन ऋषि परम्परा के अनुरूप आयोजित होने जा रहे इस महानुष्ठान में पण्डितों और भक्तों के साथ सभी आयु वर्गों के वे भी ब्राह्माण हिस्सा लेंगे जिनकी कर्मकाण्ड, भक्ति और साधना में रुचि है। इस आयोजन में क्षेत्र् के शहरों, कस्बों, गांवों और दूरदराज के इलाकों से संभागी आएंगे।
गायत्री मंत्र् के एक करोड़ जाप होंगे, विशिष्ट अनुष्ठान
इस महानुष्ठान में एक करोड़ गायत्री जप होंगे। एक ही दिन में एक करोड़ गायत्र्ी मंत्र् जप होना बांसवाडा जिले के अध्यात्म जगत के लिए एक कीर्तिमान होगा।
इसके साथ ही महानुष्ठान में राजराजेश्वर महादेव का जलाभिषेक, काल भैरव पूजन, सिद्घनाथ महादेव पूजा, भैरवानन्द समाधि पूजा, सिद्घ बाल हनुमान पूजा, महारूद्राभिषेक, गणेश जप, भैरव मंत्र् जप, हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ, सहस्र चण्डी सहित प्राच्यविद्याओं की विभिन्न उपासना पद्घतियों का दिग्दर्शन होगा।
सर्वदेव अनुष्ठान हुआ
समारोह की सफलता के लिए पौष ब़डा के अन्तर्गत जानामेडी रवीन्द्र ध्यान आश्रम में शुक्रवार को एक दिवसीय विशिष्ट सर्वदेव अनुष्ठान हुआ। इसमें विभिन्न देवी-देवताओं का आवाहन कर उनकी पूजा की गई और म् जनवरी को होने जा रहे समारोह की आशातीत सफलता के लिए प्रार्थना की गई।
धर्म परिषद का  आयोजन
कुशलबाग मैदान में होने जा रहा यह विराट अनुष्ठान बांसवाडा जिले में धर्म परिषद का म्त्त् वां अनुष्ठान है। अब तक धर्म परिषद द्वारा आयोजित इन अनुष्ठानों में क्क्� स्थानों के  हजार ब्राह्मणों की सहभागिता रही है और उपेक्षित प़डे म्त्त् मन्दिरों के जीर्णोद्घार तथा विकास के साथ ही इनमें अनुष्ठानों से दैवीय ऊर्जाओं का संचार किया गया।
व्यापक प्रचार अभियान जारी
इस विराट आयोजन को लेकर मेवाड़-वाग़ड सहित गुजरात और मध्यप्रदेश के प़डोसी इलाकों के गांवों-कस्बों और शहरों में व्यापक जन सम्पर्क, प्रचार और बैठकों का दौर चरम पर बना हुआ है। इस आयोजन को लेकर दस हजार से अधिक प्रचार पत्र्क वितरित किए गए हैं।
ध्वजारोहण शनिवार को
इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर शनिवार को मध्याह्न  बजे अभिजित मूहूर्त में विनायक पूजन, दश दिक्पाल, क्षेत्र्पाल पूजन, चौंसठ योगिनी मण्डल, भैरव, हनुमान पूजा आदि अनुष्ठानों के साथ ध्वजारोहण एवं मंगल कलश स्थापना कुशलबाग मैदान में ईशान कोण में की जाएगी। गायत्र्ी मण्डल के संरक्षक एवं प्रसिद्घ प्राच्यविद्यामर्मज्ञ ब्रह्मार्षि पं. महादेव शुक्ल ने कहा है कि ब्रह्मा ज्ञान की प्राप्ति के लिए सिद्घियों, प्रचार-प्रसार का मोह और सांसारिक ऐषणाओं को त्यागना प्राथमिक शर्त है और ऐसा नहीं करने वाला व्यक्ति न तो साधक हो सकता है, और न ही संत।
ब्रह्मार्षि पं. महादेव शुक्ल ने यह बात गायत्र्ी मण्डल परिसर में शुक्रवार को प्राच्यविद्या शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित साधक संगोष्ठी में यह विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सिद्घियां ब्रह्म ज्ञान की बाधक होती हैं और वे विघ्न बनकर साधक को गिरा सकती हैं। सिद्घियों में लिप्त रहने वाला ब्रह्म को प्राप्त नहीं कर सकता। सिद्घियाँ तो द्वार पर ही रहती हैं, जिसको प्राप्त करने पर साधक ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकता है। क्योकिं साधक सिद्घियों में लिप्त रहकर भौतिक आराधना में व्यस्त हो जाता है।
ब्रह्मार्षि पं. महादेव शुक्ल ने कहा कि गणपति शिव-शक्ति के योग से समाधि उदय होने वाली ऋतम्भरा प्रज्ञा का ज्ञान भण्डार है जिसमें ऋद्घि-सिद्घि प्रकट होती है। उनका हाथी का सिर यह प्रकट करता है कि साधक का पशुत्व अभी नष्ट नहीं हुआ है। परन्तु ज्ञान तो स्वयं ब्रह्म ही है - सत्यं ज्ञानं अनन्तं ब्रह्म- इसलिये गणेश रूप से ज्ञान रूपी ब्रह्म की उपासना वालों को विघ्नों का भय नहीं रहता।
उन्होंने सनातन धर्म में सगुणोपासना के पांच मुख्य सम्प्रदायों वैष्णव, शैव, शाक्त, गाणपत्य और सौर का जिक्र किया और कहा कि इनमें एक ही ब्रह्म की क्रमश: विष्णु, शिव, शक्ति, गणपति, सूर्य पांचों रूपों में उपासना की जाती है। शंकराचार्य के पूर्व पांचों सम्प्रदायों के अनुयायी आपस में द्वेष बुद्घि रखते थे और आपस में ल़डा करते थे, शैव विष्णु का नाम नहीं लेते तथा वैष्णव शिव का नाम नहीं लेते। इसी प्रकार अन्य उपासक भी। परन्तु श्री शंकराचार्य ने सबमें एक ही ब्रह्म की उपासना सिद्घ करके उनका पारस्परिक द्वेष दूर किया और सबको एक ब्रह्म वाद के सूत्र् में बांधकर सनातन धर्म का एक संगठन बनाया। तबसे सभी उपासकों का लक्ष्य ब्रह्म प्राप्ति माना जाने लगा है।
ब्रह्मार्षि पं. महादेव शुक्ल ने कहा कि विष्णु का अर्थ सर्वव्यापी है, इसलिए ब्रह्माण्ड का स्वामी जो सगुण रूप से सबका पालनकर्त्ता है बहिर्दृष्टि से उपासना करने वालों का इष्ट है। शिवप्राय: निर्गुण ब्रह्म का वाचक समझा जाता है। शिव पद की प्राप्ति निर्विकल्प समाधि द्वारा ही होती है। इसलिये शिव का चित्र् महा समाधिस्थ अवस्था में दिखाया गया है। शक्ति परब्रह्म की शक्ति है जो सारे विश्व में व्यक्त होकर अनेक रूप धारण कर रही है।
उन्होंने कहा कि सूर्य सारे विश्व का प्राण माना जाता है। सहस्र रश्मि: शतधा वर्तमान: प्राण: प्रजाना मुदयत्येषसूर्य:। इसलिये प्राणोपासना करने वालों के लिये सूर्य भी ब्रह्म का प्रत्यक्ष सगुण रूप है। इस अवसर पर कई साधकों ने साधना के महत्त्व और प्रभावों पर विचार रखे।
सवा करोड़ गायत्र्ी जपानुष्ठान जारी
वयोवृद्घ वेद विद्वान पं. शुक्ल ने कहा कि इस वर्ष श्रावणी उपाकर्म समय पर ब्राह्मण समाज द्वारा शकुन देखने से शुक्ल यजुर्वेद के फ्ख्वें अध्याय का छठा मन्त्र् उपलब्ध हुआ। उसका भावार्थ यह है कि जिसने पृथ्वी दृढ़ की, आकाश स्थिर किया, उस परमात्मा का स्मरण करें, अन्य से याचना करना निरर्थक है। तभी से गायत्री मंडल ने सवा करोड़ गायत्री जप उदयपुर, डूंगरपुर, प्रतापग़ढ आदि जिलों में प्रत्येक से गायत्र्ी जप एवं अन्य देव साधना का कार्यक्रम प्रारंभ किया है जो संकल्प पत्र् भराकर संख्यापूर्ति करायेंगे। यह संकल्प आद्य शंकराचार्य द्वारा प्रचारित सनातन धर्म में सबकी भावना जागृत होने तथा प्रत्येक गांव में कार्यकर्त्ता प्रचारक नियत किये जावेंगे।
डा. रणा द्वारा रोजाना यजुर्वेद पाठ
गायत्री मण्डल के संरक्षक ब्रह्मार्षि पं. महादेव शुक्ल ने बताया कि राजराजेश्वर में गायत्र्ी मंडल के वरिष्ठ सदस्य वेदमूर्ति डॉ. नर्मदाशंकर रणा द्वारा रोजाना शुक्ल यजुर्वेद का पाठ आरंभ किया गया है। इसके अन्तर्गत डॉ. रणा भगवान राजराजेश्वर को प्रतिदिन एक अध्याय पाठ सुनाएंगे। इसकी शुरूआत डॉ. रणा ने एक जनवरी मंगलवार से कर दी है।

 




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