जयपुर, ४ फरवरी। उद्योग मंत्री डॉ. दिगम्बर सिंह ने कहा है कि विकास की दौड में तिरोहित हो रहे मूल्यों को बचाने व इनकी रक्षा करने के लिए हमें अपनी मानसिकता में बदलाव लाना होगा और स्वदेशी को अपनाना होगा।
डॉ. सिंह रविवार को कोटा के अम्बेडकर भवन में २१ फरवरी से कोटा में आयोजित होने वाले स्वदेशी मेले के संबंध में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने आश्वस्त किया कि स्वदेशी के प्रचार प्रसार के लिए आयोजित इस मेले में सरकार से जिस प्रकार की भी सहायता की आवश्यकता होगी हरसंभव मदद की जायेगी। उन्होंने कहा कि विदेशी वस्तुओं के मोह में हम अपने आपको भूलते जा रहे हैं।
उद्योग मंत्राी ने कहा कि देश ने आजादी के बाद हर क्षेत्रा में जबरदस्त विकास किया और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम् स्थान बनाया परन्तु अपनी संस्कृति, विचार, देशप्रेम की भावना में हृास हुआ है। उन्होंने कहा कि एक माह पूर्व वे चिकित्सा मंत्राी थे और उन्होंने चिकित्सा मंत्राी के रूप में भारतीय आयुर्वेद एवं योग को बढावा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सूचना एवं जन सम्फ विभाग के प्रभारी संसदीय सचिव श्री भवानी सिंह राजावत ने स्वदेशी मेला आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर ही मेले आयोजित कर लोगों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित कर सार्थक पहल की है।
श्री राजावत ने कहा कि राजस्थान में दुनियां भर से २ करोड पर्यटक आते हैं। राजस्थान का कोई अंचल ऐसा नहीं जहां स्थानीय हस्तशिल्प नहीं हो। उन्होंने कैथून की चर्चा करते हुए कहा कि कैथून में कोटा डोरिया साडी बनती है। इसकी और लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्राी श्रीमती वसुंधरा राजे स्वयं कोटा साडी पहनकर रेम्प पर उतरी जिससे दुनियां भर के लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ। इसी का परिणाम था कि संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था द्वारा मुख्यमंत्राी को विमेन टूगेदर अवार्ड से नवाजा गया।
समारोह के विशिष्ट अतिथि संसदीय सचिव श्री ओम बिरला ने कहा कि १०० करोड जनता का यह देश विदेशी वस्तुओं के फैलते हुए जाल से प्रभावित हुआ और यहां गांव के कुटीर व्यवसाय बन्द हो गये तथा बेरोजगारी की स्थिति बढी। उन्होंने कहा कि लघु एवं कुटीर उद्योग गांव में स्वावलम्बन के आधार होते थे परन्तु गांव के घर तक विदेशी वस्तुओं का प्रचार होने से ये प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हम स्वदेशी उत्पाद अपनाने के लिए संकल्प लें जिससे कि स्वदेशी के आधार पर नये-नये उद्योग लगें और बेरोजगारों को रोजगार भी मिले। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह मेला लोगों में स्वदेशी की भावना जगाने के लिए प्रेरक का काम करेगा।
मुख्य वक्ता के रूप में स्वदेशी मंच के डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा ने कहा कि कोटा में आयोजित होने वाला १२६वां स्वदेशी मेला निश्चित रूप से लोगों को स्वदेशी उत्पादों के प्रति आकर्षित करने में सहायक होगा।