सुनहरी रेत के धोरों के बीच अल मस्ती और साम्प्रदायिक सद्भाव, विश्व बंधुत्व और भाई चारे की अनूठी मिसाल लिए बीकानेर शहर विकास के पथ पर लगातार एक से एक पादान ऊपर जाता हुआ औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त बिजली, पानी, भूमि आदि सबकुछ समेटे साथ ही ५२१ वर्ष का शानदार सफर । ये सब बातें बीकानेर को अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्रा पर ऐसा उकेरेगी कि विश्व देखेगा। ये है राव बीका का बीकानेर ।
बीकानेर, यह सब बातें शनिवार को स्थानीय होटल भंवर निवास में बीकानेर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ‘ थार विरासत‘ की ओर से आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के पहले दिन दो सत्राों में उभर कर सामने आए। उद्घाटन सत्रा में बीकानेर के विधायक डा. बुलाकी दास कल्ला का कहना था कि बीकानेर के लोग दूसरों के दुख दर्द में शामिल होकर उसके कष्टों का निवारण करना अपना धर्म समझते हैं। यहां के लोगों का स्वतंत्राता संग्राम में एक बडा योगदान रहा है। बीकानेर अपनी स्थापना से ही राजतंत्रा के साथ-साथ लोकतंत्रा में आस्था रखने वाला शहर है। डा.कल्ला ने कहा कि बीकानेर ने विकास की बडी ऊंचाइयां छुई है। प्रबंधन की तीन महाविद्यालय, राजस्थान कृषि विश्व विद्यालय, बीकानेर विश्व विद्यालय, दो पोलोटेक्निक कॉलेज, शिक्षा में मास्टर डिग्री की कॉलेज के साथ साथ एग्रोबिजनेश कोर्स केवल बीकानेर में ही है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर के तीन-तीन केन्द्र जिनमें ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, अश्व अनुसंधान केन्द्र व केन्द्रीय शुष्क बागवानी केन्द्र तथा तीन अभियंत्रिक महाविद्यालय है।
डा. कल्ला ने कहा कि आने वाले समय में पलाना बरसिंहसर लिग्नाइट ताप विद्युत गृह बन जाने से यहां के औद्योगिक विकास में एक बडा परिवर्तन आएगा। लिग्नाइट की तीसरी व चौथी यूनिट शीध्र ही प्रारंभ हो जाएगी। बीकानेर दिल्ली व जयपुर से अगले डेढ वर्ष से ब्रॉडगेज से जुड जाएगा। बीकानेर के साहित्यकारों ने शहर को अपनी रचनाधर्मिता से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलवाई है। बीकानेर में पर्यटन की विपुल संभावनाएं है।
उद्घाटन सत्रा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ नाटककार लक्ष्मी नारायण रंगा ने कहा कि थार विरासत जैसी संस्थाओं की जरूरत है जो आधुनिकता के इस युग में पुरानी संस्कृति, वैभव, भाईचारे तथा साम्प्रदायिक सद्भाव की परम्परा को जिन्दा रख सकें। बीकानेर की पाटा संस्कृति व अन्य रीति रिवाजों के संरक्षण के बारे में एक प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवावें।
उद्घाटन सत्रा में जनकवि हरीश भादाणी ने कहा कि पुरानी परम्पराओं से कुछ सीखें उन्हें जीवंत रखते हुए वैचारिक आदान प्रदान कर विकास की ओर बढना होगा। अतिरिक्त कलक्टर पी.सी.मावर, भंवर निवास होटल के प्रबंध निदेशक सुनील रामपुरिया ने बीकानेर के पर्यटन, कला व संस्कृति को बढावा देने में सब के सहयोग की आवश्यकता प्रकट की। आधार वक्तव्य देते हुए थार विरासत के ट्रस्टी कमल रंगा ने कहा कि ‘विरासत‘ अरबी भाषा का चार अक्षरों का एक छोटा सा शब्द है, पर यह अपने अंदर मानव के सर्जन-अर्जन, कष्ट, सहिष्णुता, परिश्रम, त्याग एवं बलिदान शौर्य-पराक्रम आदि का सुदीर्घ इतिहास समाहित किए हुए है। विरासत बहुरुपा-बहुरंगा होती है। प्राकृतिक-भौगोलिक विरासत, आध्यात्मिक-धार्मिक विरासत, सामाजिक पारिवारिक विरासत, साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत, राजनीतिक-आर्थिक विरासत, स्थापत्य मूर्तिकला विरासत, संगीत नृत्य विरासत, आचार-व्यवहार, स्वभाव, मनोविज्ञान विरासत आदि इसके अनेक रूप संभव है। देश प्रदेश के निवासियों के जीवन व्यवहार आचरण, रहन सहन, खान-पान, जीवन दर्शन पर इनका गहरा प्रभाव परिलक्षित होता है। ‘बीकाणा विरासतः उपलब्धियां और चुनौतियां पर केन्दि्रत‘ इस संगोष्ठी के प्रथम सत्रा ‘बीकाणाः अलमस्त मिजाज बनाम बदलते हालात‘ विषय पर राजस्थान खादी ग्रामाद्योग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से नगर स्थापना दिवस जन समारोह में तब्दील हो रहा है। यह शहर अलमस्त मिजाज का शहर है। शहर के कुछ स्थान सिर्फ चर्चाओं और वैचारिक आदान प्रदानों के लिए ही पहचाने जाते है। बीकानेर में अब भी साहित्यक व सांस्कृतिक जीवन काफी ऊंचाइयों पर है। यहां के लोग बिना किसी स्वार्थ के लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते है। शर्मा ने कहा कि इस शहर में अब मानवीय संवेदनाओं में कुछ कमी आ रही है। जबकि बीकानेर का इतिहास मानवीय एकता की एक मिसाल है। कथाकार मालचंद तिवाडी ने कहा कि इस शहर की विशेषता है कि लोग इशारों व छोटे-छोटे शब्दों में बडी बातें कह जाते हैं। बीकानेर के इतिहास से जुडे सामान, फोटो, कलाकृतियां आदि को संजोकर रखना होगा।
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सूरजमाल सिंह राठौड ने कहा कि यह पावन और वीर धरा है। यहां महर्षि कपिल ने सांख्य योग का दर्शन दिया। वहीं यहां के वीर नर नारियों ने नगर को वीर धरा का स्थान दिलाया। बीकानेर का आतिथ्य अपने आप में एक मिसाल है। डा. मदन केवलिया ने १९४७ के बीकानेर का जिक्र करते हुए यहां के प्रेम व भाई चारे के बारे में बताया और लुप्त होती गुरु शिष्य परम्परा पर अफसोस भी जताया। डा.श्रीलाल मोहता ने बीकानेर के प्रबुद्ध साहित्यकारों के बारे में जानकारी दी । डा. मोहता ने कहा कि बीकानेर पुराने यूनान जैसा शहर है। सभ्यता एवं संस्कृति का विकास तब होता है जब लोगों के पास आजीविका का साधन हो। खाने-पीने की पूरी व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर सामाजिक रीति रिवाजों को जिन्दा रखने के लिए प्रयास करना होगा। कथाकार कमल रंगा ने कहा कि तालाबों, मेला मगरियों का यह शहर भाईचारा लिए अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां की बोली में मिठास है। थार विरासत के ट्रस्टी राजेन्द्र जोशी ने कहा कि हमारा अस्तित्व स्वाभिमान व जीवट इस थार के वैभव में मौजूद है।
सेमिनार के द्वितीय सत्रा में ‘पर्यटन, औद्योगिक विकास और सांस्कृतिक प्रभाव‘ में मुख्य वक्ता के रूप में सुनील रामपुरिया ने कहा कि बीकानेर एक हिल स्टेशन है। यहां थार का समंदर किसी पानी के समंदर या बर्फ के पहाडों से कम नहीं है। बीकानेर विदेशी पर्यटकों के लिए अपने आप में एक अजूबा शहर है। यहां की हवेलियां देखकर वे जितने प्रभावित होते है उतने विश्व के आठ आश्चर्य को देखकर भी नहीं होते । उन्होंने कहा कि बीकानेर में पर्यटन विकास के लिए आवश्यकता इस बात की है कि आवारा पशु और गंदगी नहीं हो। पोलिथिन का प्रयोग पूरी तरह से बंद हो जाए। उन्होंने आम जन से अपील की कि वे धार्मिक आस्था कायम रखते हुए गाय गोधो को गुड व रोटी देने के लिए गौ शाला तक जाए इससे धार्मिक कार्य भी होगा और साथ ही पर्यटन विकास में भी उनका योगदान हो जाएगा।
जिला उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष के.एल.बोथरा ने बीकानेर में आैद्योगिक विकास में पंजीकरण, भूखंड लने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने और सुगमता से विद्युत कनेक्शन दिलाने का पक्ष रखा। उन्होंने बीकानेर को हवाई मार्ग से जोडने व ब्रोडगेज का तेजी से विकास करने की बात कही। व्यवसाई कुंज गुप्ता ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए पहली आवश्यकता यह है कि उद्यमी उद्यम से पूर्ण संतुष्ट न हो । उन्होंने बताया कि आंकडों के अनुसार बीकानेर में ७ हजार करोड का टर्न ओवर होना चाहिए। यहां माइनिंग, सिरेमिक्स व पर्यटन सहित अन्य उद्योग धंधों से डेढ लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। उन्होंने धार्मिक विरासत व शैक्षणिक पर्यटन जैसे मुद्दों पर भी विचार व्यक्त किए। व्यवसाई नरपत सेठिया ने कहा कि बीकानेर अल मस्त मिजाज का शहर है और एक सत्य घटना बताते हुए उन्होंने कहा कि दुश्मनी ऐसे निकाली कि एक व्यक्ति के बेटे की शादी थी बारात का स्वागत विवाह मंडप से कुछ पहले इतना अच्छा स्वागत और भोजन करवाया कि बारात जब गंतव्य को पहुंची तो कुछ भी खा पी नहीं सकी । यह इस तरह का अलमस्त शहर है। बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के दलीप भाई पारिख ने कलस्टर योजना के बारे में बताया। विभिन्न सत्राों का संचालन राजेन्द्र जोशी व हरीश बी. शर्मा ने किया। सेमिनार में एडवोकेट हीरालाल हर्ष, बीकानेर पापड भुजिया मैन्यू फैक्चरिंग एसोसिएशन के महामंत्राी गेवर चंद मुसरफ, वरिष्ठ शायर गुलाम रसूल शाद, साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद, गौरी शंकर आचार्य सहित गणमान्य लोग मौजूद थे।