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पेप्सिकों इंडिया राजस्थान के किसानों के साथ करेगी जौ की पैदावार

4 May 2008
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-पेप्सिकों इंडिया बनायेगा राजस्थानी बीयर-
पेप्सिको इंडिया ने राजस्थान में किसानों के साथ भागीदारी सुदृढ की
-देश में जौ की खेती की गुणवत्ता बढाने प्रयास-

श्रीगंगानगर,3 मई। यह खबर शायद किसानों के लिए अच्छी है कि पेप्सिको इंडिया ने अपने परफोमेंन्स विद परपस (उद्देश्य निरूपादन) की प्रतिबद्धता को मजबूत करने की एक और पहल को आगे बढाते हुए देश में उच्च गुणवत्तापूर्ण जौ की खेती को बढावा देने के लिए राजस्थान में सहयोगत्मक खेती आरंभ की है। जौ की खेती के लिए पेप्सिको ने फिलहाल 1॰ हजार एकड जमीन के लिए 12॰॰ से अधिक किसानों के साथ भागीदारी की है। देश की प्रमुख स्प्रिट निर्माण कंपनी द यूनाईटेड बे*वरिज गु*प ने बीयर तथा अल्कोहालिक पेय पर प्रमुख रूप से अपना ध्यान केन्द्रित करते हुए अपनी बियर ब्राण्ड के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त जौ की आपूर्ति के लिए पेप्सिको इंडिया से अनुबंध किया है, जिससे किसानों  को अपने उत्पाद के लिए तैयार बाजार उपलब्ध होने की सुनिश्चतता मिल गई है। पेप्सिकों ने अपनी जौ की खेती के लिए राजस्थान के श्रीगंगानगर तथा हनुमानगढ क्षेत्र को शामिल किया है। इसके अन्तर्गत पेप्सिकों इंडिया इन क्षेत्रों के किसानों को उच्चगुणवत्ता युक्त बीज, तकनीकी ज्ञान, उवर्रक तथा कृषि के लिए आवश्यक पैकजिंग व अन्य सहायता प्रदान कर उनकी उत्पादकता, उत्पादन तथा आय को सकारात्मक रूप से बढाने में योगदान दे रही है। पेप्सिको ने माल्ट बार्ले सीड्स की नई उच्च पैदावार वाली किस्म भी प्रस्तुत की है।
 इस अनूठी पहल के बारे में पेप्सिेको इंडिया के एक्जिक्यूटिव वॉइस प्रेसिडेंट श्री अमित बोस ने बताया कि पेप्सिकों  इंडिया की कृषि को सहयोग प्रदान करने की परम्परा रही है। वर्षो से यह उचित लागत की पैदावार विकसित करने के लिए कृषक समुदाय के साथ सहयोग कर रही है। पेप्सिकों इंडिया स्थानीय कृषि आधारित उत्पादों के लिए विवस्तरीय तकनीक भी उपलब्ध करवा रही है। इस कार्य में पंजाब, कर्नाटक तथा पश्चिम बंगाल में मिली सफलता  ने इसे देश के अन्य हिस्सों के साथ राजस्थान में भी लागू करने के लिए आत्मविश्वास प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त जौ की खेती में गेहूं तथा सरसों जैसी अन्य फसलों से कम पानी की आवश्यकता होने से राजस्थान के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं। सर्दी की अन्य फसलों से हटकर जौ की फसल को पानी की कम आवश्यकता पडती है तथा अन्य फसलों की तुलना में यह खारेपन तथा  अम्लीयता के प्रति ज्यादा सहनशील होती है। इसलिए उन क्षेत्रों के लिए जहां अनुपयुक्त  जमीन तथा अपर्याप्त सिंचाई के कारण गेहूं की अच्छी फसल लेना संभव नहीं है, वहां इसका ज्यादा महत्व है। श्री अमित बोस ने किसानों पर पडने वाले इसके सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे किसानों की उत्पादकता, पैदावार तथा आमदनी में महत्वपूर्ण इजाफा हुआ है। जो किसान पहले अधिकतम चार रुपये प्रति किलोग्राम कमता था अब वह अपना उत्पाद 9 से 10 रुपये प्रतिकिलों बेच पाने लायक बन गया है। इसके साथ उच्च गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति तथा किसानों को तकनीकी ज्ञान प्रदान करने से उनकी उत्पादकता में भी महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि हुई है। एक बात तो तय है कि पेप्सिको की नई पहल का प्रमुख उद्देश्य भारत में न केवल जौ की पैदावार की गुणवत्ता को बढाना है,बल्कि इसके साथ-साथ पूरे विश्व में भारत देश को जौ प्रमुख उत्पादक देश एवं निर्यातक राष्ट्र की विशष्टि स्थिति में तब्दील करना है।



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