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दलितों को राजनैतिक महत्व देना राजनैतिक दलों की मजबूरी : बूटासिंह
4 Aug 2007

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बिहार के भूतपूर्व राज्यपाल व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार के अध्यक्ष सरदार बूटासिंह आज बीकानेर आए। उन्होंने बीकानेर के लूणकरणसर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सरदार बूटासिंह का बीकानेर के लालगढ रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत किया गया। बाद में बीकानेर के सर्किट हाउस में सरदार बूटासिंह पत्रकारों से रूबरू हुए। प्रस्तुत है सरदार बूटासिंह से संवाददाता श्याम नारायण रंगा द्वारा की गई बातचीत के प्रमुख संपादित अंश :
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार के अध्यक्ष सरदार बूटासिंह ने कहा है कि आज आजादी के साठ साल बाद भी दलित आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछडी हालत में है। सरदार बूटासिंह ने यह भी कहा कि राजनैतिक रूप से दलितों का जरूर उत्थान हुआ है लेकिन आज भी सवर्ण जाति के लोग दलितों को हीन भावना से देखते हैं। सरदार बूटासिह ने यह भी कहा कि दलितों को राजनैतिक महत्व देना प्रत्येक राजनैतिक पार्टी की मजबूरी है। बूटांसंह ने दलितों की इस हालत के लिए दलितों को भी दोषी ठहराया और कहा कि वे दलित जो थोडे पढ लिख कर या सम्पन्न होकर अपने समाज से दूर हो रहे हैं वे गद्दार है तथा ऐसा करना गलत ह। बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के दिखाए रास्ते पर चलने का आह्वान करते हुए सरदार बूटासिंह ने कहा कि दलितों को शिक्षित, संगठित और सामाजिक रूप से एकजूट होने की जरूरत है ताकि दलितों को आजाद भारत में वो सम्मान मिल सके जिसके वे हकदार हैं।
सरदार बूटासिंह ने दलितों की स्थिति का चित्रण करते हुए कहा कि आज भी सरकारी नौकरियों में दलितों की संख्या नहीं के बराबर है। मात्र छः प्रतिशत दलित ही आइएएस, आईपीएस हैं, न्यायिक क्षेत्र में भी दलित नाममात्र के हैं। बूटासिंह ने कहा कि जब तक दलित स्वयं अपना विकास नहीं करेगा तब तक वह सम्मानजनक स्थिति में नहीं आ सकता।
सरदार बूटासिंह ने कहा कि चाहे कोई भी सरकार रही हो प्रत्येक सरकार ने दलितों को राजनैतिक महत्व तो दिया लेकिन दलितों को मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, सडक जैसी सुविधाओं से महरूम रखा।
जब सरदार बूटासिंह से बिहार के राज्यपाल के दौरान हुए घटनाक्रम के बारे में बात की तो बूटासिंह ने कहा कि उन्होंने बिहार के राज्यपाल पद पर रहते हुए कोई भी असंवैधानिक कदम नहीं उठाया, उन्होंने वही किया जो उस परिस्थितियों में संवैधानिक रूप से किया जाना चाहिए था। बूटासिंह ने कहा कि पिछले पंद्रह सालों से बिहार में जंगलराज चल रहा था, कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज बिहार में नहीं थी और उन्होंने बिहार में कानून का शासन स्थापित किया जिसकी प्रशंसा भूतपूर्व राष्ट्रपति कलाम ने भी की।




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महत्व
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दलों
मजबूरी
बूटासिंह


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