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स्वतंत्रता आंदोलन के लिए संघर्षमय जीवन को प्रदर्शित करती पंक्तियां
4 Oct 2009

मौत से वीर को हमने नहीं डरते देखा, तख्त ए मौत पै भी खेल ही करते देखा


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मौत से वीर को हमने नहीं डरते देखा
तख्त ए मौत पै भी खेल ही करते देखा।
वतन हमेशा रहे, शाद, काम और आजाद
हमारा क्या है, अगर हम रहे, रहे न रहे।

ये पंक्तियां स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामनारायण जी शर्मा के स्वतंत्रता आंदोलन के लिए संघर्षमय जीवन को प्रदर्शित करती है।
Freedom Fighter Late Sh. Ram Naryan Sharmaमहात्मा गांधीजी के ‘करो या मरो’ कार्यक्रम से प्रभावित होकर स्वतंत्रता सेनानी श्रीरामनारायण शर्मा की माताजी का निधन बाल्यावस्था में ही हो गया था। दस वर्ष की आयु में पिता को बीकानेर महाराजा ने देश निकाला दे दिया। सन् 1942 ई. में परिवारजन से नाराज होकर हरिद्वार चले गए। उस समय संपूर्ण देश में गांधीजी ने अंग्रेजों भारत छोडो और करो या मरो के नारे के साथ स्वतंत्रता की अलख जगा दी थी। हरिद्वार में छात्रों द्वारा निकाले गये जुलूस में श्रीरामनारायण जी शर्मा सम्मिलित हुए। इस जुलूस ने पुलिस कोतवाली पर हमला कर दिया तथा रायफल इत्यादि छीन ली व पूरे क्षेत्र में तोडफोड आदि करके आंदोलन को हिंसात्मक रूप दे दिया, किसी तरह पुलिस की नजर से छिपते हुए दिल्ली आ गए। यहां स्पेशल रेजीमेंट लखनऊ (लांगरिया) में भर्ती हुए, 11 महीनों तक उसमें कार्य किया। पिताजी को दिल्ली में होने का मालूम होने पर वे उन्हें बीकानेर ले आये। बीकानेर में रघुवर दयालजी गोयल द्वारा प्रजा परिषद के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाया जा रहा था। उस समय बीकानेर में अंग्रेजों के खिलाफ इश्तिहार पेपर इत्यादि हस्तलिखित निकाले जाते थे और रात के समय शहर के विभिन्न स्थानों पर चिपकाये जाते थे। पिताजी के आदेश पर रामनारायणजी शर्मा ने 9 दिसम्बर 1942 को हाथों में तिरंगा झण्डा लेकर वैदों के चौक में नारे लगाते हुए सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया, जिसके कारण दाऊजी रोड, तेलीवाडा चौकी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। रात्रि को चांदमलजी ढड्डा कोटडी में ले जाकर उनके साथ मारपीट कर काल कोठरी में बंद कर दिया गया। 26 जनवरी 1943 को श्रीरघुवर दयालजी गोयल इत्यादि के साथ श्रीलक्ष्मीनाथजी मंदिर के बाग में झण्डा फहराने का निश्चय किया गया। वहां पर तिरंगा झण्डा फहराने व भाषणबाजी के दौरान रास्ते में ही उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। उसी दौरान महाराजा श्रीगंगासिंहजी का देहांत हो गए। महाराजा श्रीगंगासिंहजी के स्वर्गवास के दिन से ही श्रीरामनारायण शर्मा ने जेल में भूख हडताल प्रारंभ कर दी कि या तो उन पर मुकदमा चलाया जाये या उन्हें छोड दिया जाए। कुछ समय पश्चात श्रीरामनारायणजी व श्रीरघुवर दयाल गोयल को जेल से रिहा कर दिया गया। उस समय दीनबंधु अखबार में छपी खबर से नाराज होकर महाराज ने श्रीगंगादास  कौशिक, दाऊदयाल आचार्य, श्रीरघुवर दयाल गोयल आदि को गिरफ्तार कर अलग-अलग जगह जेल में भेज दिया गया। प्रजा परिषद के माध्यम से बीकानेर तथा श्रीगंगानगर में स्वतंत्रता अंादोलन की अलख जगाते हुए पंजाब में भी श्रीरामनारायण शर्मा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नागौर के राजनीतिक सम्मेलन, दूधवाखारा आंदोलन को जागृत करने के लिए उनको अनेक बार जेल जाना पडा। श्रीगंगादास कौशिक, श्रीरघुवर दयाल गोयल, श्रीचम्पालाल उपाध्याय, श्रीसोहनलाल, श्रीचिरंजी लाल सुनार, श्रीमुगधाराम दर्जी, श्रीराम आचार्य आदि के साथ स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। महीनों जेल में रहने के दौरान पैरों में बेडियां डालकर रखा जाता था तथा प्रतिदिन 18 सेर आटा पीसना पडता था। जेल में Mahendra Khadgawat - Director - Rajsthan State Archieves Department, Bikanerश्रीरामनारायणजी शर्मा व दुग्गड महाराज की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई। उन दिनों उदयपुर में देशी राज परिषद का अधिवेशन चल रहा था, जिसमें नेहरूजी भी भाग ले रहे थे। श्रीरघुवर दयालजी गोयल जिनको कि देश निकाला दे दिया था, के द्वारा पहुंचाई गई खबर से नेहरूजी द्वारा राज परिषद में प्रस्ताव पास किया गया कि बीकानेर के स्वतंत्रता आंदोलन व आंदोलनकारियों के बारे में नेहरूजी ने बहुत कुछ कहा था। डॉ.मेनन की मध्यस्थता में एक समझौता वार्ता संपन्न हुई तथा वार्ता में यह तय हुआ कि कपडे इत्यादि जेल में घर से ला सकेंगे और अखबार आदि उपलब्ध करवाया जायेगा। उस समय जेल में भोजन के रूप में दो मुट्ठी चना, तुलवीं रोटी दी जाती थी। श्रीरामनारायणजी कहते है कि उस समय जेल में ए-क्लास, बी-क्लास नहीं होती थी। आज के समय में जेल में ए-क्लास, बी-क्लास होती है फिर भी लोग जेल में जाने से घबराते है। उसी समय श्रीगंगानगर, संगरिया, चूरु, जाकर रामनारायणजी शर्मा ने स्वतंत्रता आंदोलन की अलख को जगाने का प्रयास भी किया।
श्रीरामनारायण जी ने अपने अंतिम दिनों हुई बातचीत में यही कहा कि कुछ आरजू नहीं है, है आरजू तो ये है। रख दे कोई जरा सी, खाके वतन कफन में।
राज्य अभिलेखागार देश के लिए कुर्बान हुए राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को नमन करते हुए तथा उनके प्रति अपनी सच्ची श्रद्धांजलि उनके संस्मरणों को सदैव के लिए सुरक्षित व संरक्षित कर दिया है, उनको लिपिबद्ध कर पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित कर रहा है। शीघ्र ही बीकानेर संभाग के स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन किया जायेगा, जिसमें श्रीरामनारायणजी शर्मा सहित 26 स्वतंत्रता सेनानी सम्मिलित होंगे। आने वाली पीढी को प्रेरणा देने व अपने गौरवमयी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए स्वतंत्रता सेनानी दीर्घा पर कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

डॉ.महेन्द्र खडगावत - निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर।




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