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दो दिन कतरियासर में बिताने के बाद सम्पन्न हुआ ऊँट उत्सव - 2007
5 Jan 2007

बीकानेर के कतरियासर में आयोजित हुआ दो दिन तक ऊँट उत्सव। कतरियासर में पहले दिन दो विदेशी जोडो की शादी भारतीय परम्परानुसार करवाई गई। ये दोनों जोडे चेकोस्लोवाकिया के हैं। एक जोडे से बात करने पर उन्होंने बताया कि वे पिछले पाँच साल से साथ रह रहे हैं और जब भारत आए तो पता चला कि बीकानेर के ऊँट उत्सव में शादी समारोह है तो उनसे रहा नहीं गया और यहां आकर शादी कर ली। दोनों ने कहा कि वे जन्म जन्म तक साथ रहेंगे।


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Bride and groom enjoyed very much this marriage. Giving a Camera Shot after just married. बीकानेर के कतरियासर में आयोजित हुआ दो दिन तक ऊँट उत्सव। कतरियासर में पहले दिन दो विदेशी जोडो की शादी भारतीय परम्परानुसार करवाई गई। ये दोनों जोडे चेकोस्लोवाकिया के हैं। एक जोडे से बात करने पर उन्होंने बताया कि वे पिछले पाँच साल से साथ रह रहे हैं और जब भारत आए तो पता चला कि बीकानेर के ऊँट उत्सव में शादी समारोह है तो उनसे रहा नहीं गया और यहां आकर शादी कर ली। दोनों ने कहा कि वे जन्म जन्म तक साथ रहेंगे। इस विवाह समारोह को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड उमड पडी। इसी दिन तीन जनवरी को कतरियासर में ऊँट दौड प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस दौड में ग्रामीणों ने अपने अपने ऊॅट दौडाए और इस दौड को देखने के लिए हजारों लोगों का हूजूम उमड पडा। जो विदेशी पर्यटक वहां मौजूद थे उन्हें यह दौड काफी रोमांचक लगी। बाद में इसी दिन आयोजित हुई रस्साकसी की प्रतियोगिता। इस प्रतियोगिता में एक टीम थी भारतीय ग्रामीण नौजवानों की और दूसरी तरफ थे विदेशी नौजवान। दोनों ने दोAnother Snap of Tug of war competitor in Camel Festival 2007 at Katriasar. बार जमकर जोर आजमाईश की लेकिन भारतीय नौजवानों ने इस प्रतियोगिता में विदेशियों को हरा दिया। हराने के बाद यह बात भी हुई कि यार न तुम हारे न हम जीते। यह तो खेल था जिसमें भारतीयों ने विदेशियों के साथ खेलकर जमकर आनंद लिया। विदेशी खिलाडयों ने भी कहा कि यह उनके जीवन का अद्भुत अनुभव है जिसे वे याद रखेंगे। इसी दिन कतरियासर के धोरों पर धोरा चढने की प्रतियोगिता हुई। नौजवानों ने पूरे दमखम के साथ धोरों पर चढाई की। इस प्रतियोगिता को भी मौजूद हजारों लोगों ने जमकर सराहा। शाम को कतरियासर के धोरों में रंगीन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ।  इस कार्यक्रम में पंजाबी बेगपाईपर की धूम रही और इसी धुन के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ। राजस्थानी घूमर, गोरबंद, लहरियो , व लोकधुनों का जो रंग जमा वह देर रात तक जारी रहा। इस कार्यक्रम को हजारों लोगों की उपस्थिति ने सार्थक बनाया। राजस्थानी लोक कलाकारों ने अपनी आवाज व विशिष्ट शैली में लोक गीत प्रस्तुत किए। इन लोक गीतों को सुन कर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इसी दिन रात को कतरियासर के जसनाथी सिद्ध समाज के लोगों ने आग पर नृत्य कर उपस्थित जनसमुदाय को रोमांचित कर दिया। इस समाज को जसनाथ जी महाराज का वरदान है कि वे अग्नि नृत्य कर सकते हैं। जलती आग पर यह लोग ऐसे नाचे जैसे फूलों की पंखुडयों पर नाच रहे हों। जलते अंगारों को इस तरह खाया जैसे कोई मिठाई खा रहे हो। इस अग्नि नृम्य को देखकर लोगों के रोमांच की सीमा नहीं रही। इस तरह ऊँट उत्सव बीकानेर का दूसरा दिन पूरी हंसी खुशी के साथ बीता। चार तारीख को था ऊँट उत्सव का तीसरा व आखिरी दिन। इस दिन कतरियासर में मटका दौड व मटका फोड प्रतियोगिता आयोजित हुई। इस प्रतियोगिता में विदेशी महिलाओं व देशी महिलाओं ने अपने सिर पर मटकों को रखकर दौड लगाई। इस प्रतियोगिता का विदेशी बालाओं ने जमकर लुफत उठाया। इसी तरह आयोजित हुई मटका फोड प्रतियोगिता। इस प्रतियोगिता में ऑखों पर पट्टी बांधकर दूर से हाथ में लट्ठ लिए आना था और अपने हिस्से की मटकी को लट्ठ से फोडना था। कुछ ने तो मटकियाँ फोडी और कुछ नें सिरकाई। यह प्रतियोगिता इस कदर रोमांचक थी कि वहां मौजूद विदेशी व देशी महिलाएं अपने आप को रोक न सकी और इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसी दिन ऊॅटनी दौड प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। इस प्रतियोगिता में ऊॅटनियों की दौड हुई। इस दौड की रोचकता इस कदर थी कि हजारों लोगों ने इस प्रतियोगिता को सराहा। इसी दिन रात को बीकानेर के करणीसिंह स्टेडियम में इंडियन एयर फोर्स के ऑर्केस्ट्रा ने रंग जमाया। इस ऑर्केस्ब्ट्रा को सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड करणीसिंह स्टेडियम में उपस्थित थी। इस दल की धुन ने वहां मौजूद हजारों श्रोतओं को देर रात तक बांधे रखा। बीकानेर में अपनी तरह का यह पहला प्रोग्राम था। इस कार्यक्रम को जमकर तालियाँ मिली व सराहा गया। इस तरह इस साल का ऊॅट उत्सव सम्पन्न हुआ इस उम्मीद व विश्वास के साथ की अगले साल फिर मिलेंगे इसी जगह इसी तरह इसी उत्सव में।




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