बीकानेर के पीबीएम अस्पताल मे तीन दिन पूर्व मुरलीधर व्यास नगर निवासी कुसुम ने एक ऐसे बच्चे को जन्म दिया है जिसके पैदा होते ही शरीर मे १०० फ्रेक्चर है तथा जहां पर हाथ लगाये वहां की हड्डि टूट जाती है।
मॉल युनियनिज्म बीमारी से ग्रसित इस नवजात के जहां कही भी हाथ लगाये वहां हड्डि टूट जाती है। विषय विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने बताया कि यह बीमारी ऑस्टोजेनिसियम इम्परफेक्ट अर्थात जन्मजात बीमारी है जो कि माता अथवा पिता मे दोनो मे से कीसी एक को भी हो तो यह बीमारी होने वाले शिशु को भी इसके लगने की सम्भावना होती है।
डॉक्टर्स से जब इसके जीवित रहने की सम्भावना के बारे मे बारे मे पुछा तो उनका कहना था कि मेडिकल सांइस इसकी उम्र ७ दिन से १ साल तक मानती है। उन्होने बताया कि यह बीमारी सात स्तरीय होती है और इस बच्चे को Fatal Outcome अर्थात सातवें स्तर की ही बीमारी लगी है कि अनरिकवरेबल होती है। डॉक्टर ने बताया कि हमने सभी चेकअप कर लिए है तथा हड्डि रोग विशेषज्ञों ने भी चेक-अप कर लिया है पर कोई रिकवरी सम्भावना नही है।
विशेषज्ञ डॉक्टर ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह हमारे लिए कोई विशेष दुर्लभ स्थिति नही है वरन् हमने पढाई के दौरान भी इसको जाना है और कम से कम ६-७ केस मैने अपने जीवन मे देखे है जिसमे एक के केस तो एक माह पूर्व का ही है जिसमे इसी तरह का एक बच्चा पैदा हुआ था लेकिन वो ज्यादा जिंदा नही रह सका।
अस्पताल मे आम आदमियों क सेवा मे लगे पूर्व सभापति चतुर्भज व्यास ने बताया कि मैने अपने जीवन मे ऐसी घटना पहली बार देखी है जिसमे नवजात के जन्म से ही सौ फेक्चर हो और फिर जहंा हाथ लगे वहां हड्डि टूट जाये। उन्होने उन्होने डॉक्टर्स के इस वक्तव्य पर ”कि माँ बाप के जेनेटिक्स गुणों के कारण ही संतान पर इसका ऐसा असर पडता है तो आने वाली संतान पर भी इसका पड सकता है“, जिसका निवारण होना जरूरी है और इसके लिए विशेषज्ञ डाक्टर्स को अनुंसधान करना चाहिए ताकि भविष्य इस बीमारी से बचा जा सके।
असमंजस की स्थिति मे जी रहा परिवार इस पूरे प्रकरण मे हैरान है। हालांकि बच्चे के बारे मे प्रसूता को कुछ भी नही बताया गया है। एक बार तो नवजात के परिवाजनों के बीच यह भी बात फैली की नवजात के हड्डियाँ ही नहीं है जो कि और केवल माँस का शरीर है।
डॉक्टर्स ने बताया कि बच्चा अभी जीवित है तथा पीबीएम नर्सरी मे देखभाल चल रही है।