बांसवाडा, ५ मार्च/वयोवृद्ध प्राच्यविद्यामनीषी एवं गायत्री मण्डल के संरक्षक ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने कहा है कि गायत्री उपासना से मनुष्य में सद्बुद्धि, सदाचार और सद्कर्म का उदय होता है और इससे लौकिक जीवन में आनन्द से परिपूर्ण सफलताओं के साथ ही पारलौकिक जीवन यात्रा सफल होती है।
ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने यह उद्गार बुधवार को यहां वनेश्वर शिवालय परिसर में गायत्री मन्दिर प्रांगण में चल रहे पं. उमाशंकर पाठक दस दिवसीय स्मृति अनुष्ठान शिविर के अन्तर्गत गायत्री साधना की महिमा पर अपने व्याख्यान में प्रकट किए।
उन्हने गायत्री रहस्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह ब्रह्माण्ड गायत्री ही है। वेद, उपनिषद, वेदांग, ब्राहमण, पुराण और समस्त धर्मशास्त्र गायत्री के ही कारण पवित्र माने जाते हैं।
ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने कहा कि गायत्री जप करने से साधक का मनोमालिन्य और शारीरिक एवं मानसिक विकारों का धीरे-धीरे निवारण होने लगता है और देवत्व तथा दिव्यत्व का आविर्भाव होता है। यही आगे चलकर सिद्धि और भगवत् साक्षात्कार का माध्यम बनती है।
पं. विजय त्रिवेदी का अभिनंदन
इस अवसर पर एक करोड गायत्री जप करने वाले प्रमुख गायत्री साधक पं. विजयकुमार त्रिवेदी ’’गायत्री‘‘ का ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल एवं गायत्री साधक पण्डितों ने शॉल ओढा कर अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में पं.विनय भट्ट, पं. नरेन्द्र आचार्य एवं पं. अंकित त्रिवेदी (छींछ), पं. चन्द्रकान्त मेहता(घाटोल), पं. देवेन्द्र शुक्ल, पं. गिरीश जोशी महाराज आदि विचार व्यक्त किए।