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श्रीगंगानगर, (लक्ष्मीकान्त शर्मा) आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में कैरियर को लेकर युवा वर्ग काफी चिंतित है। युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को ध्यान में रखते हुए आईएनआईएफडी द्वारा युवाओं को विभिन्न डिजाइनिंग क्षेत्रों में जोडने का प्रयास किया जा रहा है। यह बात आईएनआईएफडी संचालिका व डिजाइनर पारूल भाटिया ने बताई। उन्होंने बताया कि आज युवाओं को सही मार्गदर्शन की जरूरत है उन्हे एकेडमी शिक्षा के साथ-साथ टेक्नीकल पाठ्यक्रम में बहुत से कोर्स आते हैं। जिनमें मुख्य रूप से डिजाइनिंग का क्षेत्र महत्वपूर्ण है। वह बताती है कि सन् 2000 में आईएनआईएफडी. श्रीगंगानगर म शुरू हुआ था। आज आठ साल होने को है आज लगभग 500 विद्यार्थी अपना कैरियर बना चुके है और अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत है। फैशन डिजाइनिंग में प्रायोगिक पाठ्यक्रम में युवाओं को आने वाले कल के बारे में बताया जाता हैं। जिसमें युवाओं को डिजायनों का ज्ञान हो सके। वर्तमान समय को देखते हुए करियर का चयन करते समय विद्यार्थी को घबराना नहीं चाहिए बल्कि सूझबूझ के साथ फैसला करना चाहिए। जिससे वह एक अच्छी जॉब पा सके। उस जॉब को करने में उन्हे सम्मान, धन, सम्पति और आगे बढने के अवसर मिल सके। आज फैशन डिजाइन व टैक्सटाइल डिजाइन के क्षेत्र में रोजगार के काफी अवसर है। कैरियर विकल्प का निर्णय सोचने के पश्चात् यह भी जरूरी है कि कोर्स किस संस्था से किया जाएं। क्योकि आज कल हर शहर में संस्थानों की भरमार है इसलिए जरूरी है कि संस्था का चुनाव सोच-समझकर किया जाए जो कि बाद में उपयोगी हो सके। उन्होंने बताया कि इन्टरनेशनल इस्टीयूट ऑफ फैशन डिजाइन इस क्षेत्र म महत्वपूर्ण भूमिका बनाए हए है। अन्नामलाई यूनिवर्सिटी टेक्निकल कोलेबोरेशन के साथ मिलकर पाठ्यक्रम करवाता है। डिजाइन पारूल भाटिया ने बताया कि पूरे देश में 200 केंद्र आईएनआईएफडी के हैं। जिसमें श्रीगंगानगर आईएनआईएफडी. ने अपनी अनूठी छाप छोडी, 2006 में उनके द्वारा मलेशिया के कुआलालम्पुर एक्जिबिशन में फैशन व टैक्सटाइल के कुछ डिजाइन ले जाए गए थे। जिसमें मलेशिया आस्ट्रेलिया समेत रूस आदि देशों में डिजायन को सराहा गया। इसी तरह 2007 में इमेजिज रिटेल मैंगनिज में श्रीगंगानगर के डिजाइनों को सराहा गया जो कि इण्डोपेरिस में प्रिन्ट होती है। हाल ही में पारूल भाटिया को युवाओं को कैरियर से जोडने व ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने के लिए गंगानगर की बेटी का अवार्ड मिल चुका है तथा राजस्थान की प्रसिद्व मैगजीन सुजस में पिछले दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य किए गऐ कार्य जिसमें महिलाओं को रोजगार से जोडा गया, में भी सफलता की कहानी में महिला स्वावलम्बन के रूप में प्रिन्ट हुई है। इससे पहले भी श्रीगंगानगर के विद्यार्थियों को डिजायनर पारूल भाटिया द्वारा तैयार करवाए गए वस्त्रों को एक जादूगर के शौ में मोरिशस में प्रस्तुत किया गया था। प्रत्येक वर्ष संस्थान द्वारा फशन शो आयोजित किया जाता है। जिससे विद्यार्थियों को एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिलता है। उसमें आगे आने के लिए आत्मविश्वास बढता है। संस्थान द्वारा अन्नामलाई यूनिवर्सिटी द्वारा फैशन डिजाइन, टैक्सटाइल डिजाइन, इन्टीरियर डिजाइन आदि कई तरह के पाठ्यक्रम करवाए जाते है जो कि 10 वीं तथा 12 वीं कक्षा के बाद विद्यार्थी आवेदन कर सकते है। संस्थान द्वारा विद्यार्थी कई बडी एक्सपोर्ट हाउस में जॉब कर रहे है। जिसमें मुख्य रूप से अलाकृति टैक्सटाइल, रतन टैक्सटाइल- जयपुर, रामचंद्र एडं संस- चण्डीगढ, शिवलिका प्रिन्टस, विद्या फैशन, माया एक्सपोर्टस, एमएस इन्टर नेशनल दिल्ली, पानीपत, गुडगांव आदि जगहों पर जॉब कर रहे है। फैशन डिजाइनर पारूल भाटिया कहती हैं कि वह स्वंय दिल्ली से हैं और आज श्रीगंगानगर में शिक्षा दे रही हैं और युवाओं का मार्गदर्शन कर रहीं है।
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