बीकानेर, बिन्नानी कॉलेज में छात्राओं के द्वारा शिक्षक दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सचिव श्री गौरी शंकर जी व्यास व प्राचार्य श्री पी.आर. जोशी ने मॉ सरस्वती के छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर भावांजलि दी। इस क्रम में छात्राएं मीनाक्षी, पुष्पा, इन्दु, तथा शबनम ने हे शारदे मॉ प्रार्थना की सस्वर प्रस्तुति दी। बी.एड. की छात्रा शालू ने शिक्षक दिवस पर अपने विचार व्यक्त किये । इसके पश्चात् सरोज स्वामी, मीनाक्षी टाक, चित्रा आदि ने सामूहिक स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। मारा छैल भंवर जी गीत पर बी.एड की छात्रा ने अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति दी। बी.कॉम तृतिय वर्ष से सरिता मूंधडा ने अंग्रेजी में व्याख्यान, बी.ए.की छात्रा शिवानी सिंधोदिया ने शिक्षक शब्द की व्याख्या प्रस्तुत कि जहां डालिमा शर्मा ने गीत लिखन तालिये तू हो के दयाल बी.ए. द्वितिय वर्ष से मनीषा टाक, राधिका, श्वेता तथा स्वाति ने गीत ’’चरण कमल बलिहारी तथ स्पार्कल ग्रुप ने व बी.एड. से मीनाक्षी टाक ने क्रमश ’’पायोजी मैने राम रतन धन पायो‘‘ व ’’थारी ज्योत जले गिगनार‘‘ गीत की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी। कार्यक्रम के अन्तिम चरण में महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के सचिव श्री गौरी शंकर जी व्यास ने शिक्षक को ज्योतिपुंज बताते हुये कहा कि आज का दिवस दार्शनिक व चिंतक श्री सर्वौपल्ली राधा कृष्णनन की याद में शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है। श्री व्यास ने कहा कि गुरू बिन ज्ञान, गंगा बिन तीर्थ, एकादशी बिन व्रत सम्भव नहीं हो सकता । गुरू वास्तविकता में वह दृष्टि है जो आत्मा को परमात्मा से जोडता है। लेकिन उन्होने इस बात पर चिन्ता जतायी की शिक्षा आज व्यापार बनता जा रहा है जो शिक्षा के विकृत और कुछ हाथों में ही केन्द्रीयकरण हो जाने का प्रतीक है।
अतः महाविद्यालय के प्राचार्य श्री पी.आर. जोशी आज के दिवस पर अपने गुरूओं को याद किया । उन्होनें इस बात पर गहरी चिन्ता व्यक्त की कि आज शिक्षक और शिष्य के संबंधों में दरार आती जा रही है उन्होने कहा कि इसका कारण शायद शिक्षा मूल्यों का दूर हो जाना है और व्यवसाय का हावी हो जाना है। उन्होने कहा कि पूर्व में एक शिक्षक शिष्य को शिक्षित करने का वादा करता था परन्तु आज यह संबंध भी कॉर्मशियल हो गया है। अतः उन्होने कहा कि हमें शिक्षा से उत्पाद नहीं बल्कि गुणवान व सदाचारी मनुष्य को तैयार करना है।