जयपुर । प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल ने कहा है कि आने वाले समय में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित होंगे जिससे राजस्थान की देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान होगी। मेघवाल शनिवार को बिडला आडिटोरियम, जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय भामाशाह एवं शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर राज्य स्तरीय पुरस्कार सम्मानित भामाशाह, प्रेरकों एवं शिक्षकों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे सम्मानित शिक्षकों से सीख लेकर उनका अनुकरण कर प्रशंसनीय कार्य करें जिससे कि राज्य के सभी गांवों एवं ढाणियों में व्यवस्थि व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संकल्प को पूरा किया जा सके। उन्होंने ने कहा कि गत वर्षो में अधिक संख्या में स्कूल खोल दिये तथा आवश्यक शिक्षकों व आधारभूत सुविधाओं का विकास नहीं किया गया अब शीघ्र ही सभी स्कूलों में प्रधानाध्यापक व शिक्षक तथा आधारभूत सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता व तेज गति से किया जायेगा जिसकी कडी में पदोन्नति का कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है तथा आगामी दो माह में प्रदेश का कोई भी स्कूल प्रधानाध्यापक व शिक्षक विहिन नहीं होगा लेकिन हम सबको भी गुरू के सम्मान को बचाये रखने के लिए अपने कर्तव्यों को पूर्ण लगन व मन से पूरा करना होगा। मेघवाल ने कहा कि राजस्थान की धरती वीर प्रसूता है। वीर और दानी राजस्थान की पहचान एवं शान रहे हैं। महाराणा प्रताप जैसे वीर शासक ने स्वतंत्रता की अलख जगाए रखी तो भामाशाह जैसे दानवीर ने उस अलख को जगाए रखने में अपनी भूमिका उस वक्त निभाई जिस वक्त महाराणा को धन की सख्त आवश्यकता थी। अतुल सम्पति पाकर महाराणा धन्य हुए तथा भामाशाह का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया। सम्मानित सभी भामाशाहगण उन्हीं की परम्परा को आगे बढाते हुए राजस्थान की शिक्षा में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। मेघवाल ने कहा कि विद्यादान और धनदान दोनों ही श्रेष्ठता की श्रेणी में आते हैं यदि धन का अभाव दूर कर भामाशाहों ने विद्यालय की छवि सुधारी है तो कर्मठ गुरूजनों ने विद्यादान कर राजस्थान की शिक्षा की गुणवत्ता को उन्नत किया है। दोनों ही बधाई के पात्र एवं सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने ने कहा कि शिक्षा, विकास का मूल है। शिक्षा का सार्वजनीकरण राजस्थान की पहली प्राथमिकता है। विभिन्न प्रयासों और इतने उदार चेता दानवीर भामाशाहों के होते हुये भी अभी तक हम प्रत्येक बालक-बालिका को शिक्षा मुहया नहीं करा सके हैं यह हमारे लिए गम्भीर चुनौती की बात है। राजस्थान राज्य 2011 तक शिक्षा के सार्वजनीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करे इसके लिए केवल सरकारी प्रयासों से काम नहीं चलने वाला बल्कि जनसहभागिता, भामाशाहों तथा कर्मनिष्ठ शिक्षकों के सतत् प्रयत्न एवं त्याग की अति आवश्यकता होगी। समारोह में यातायात व संस्कृत शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारा प्रदेश तीव्र गति से आगे बढ रहा है। जन सामन्य के हृदय में शिक्षा की महत्ता और उपादेयता को समझने की उत्कंठा जगी है और पढने लिखने का वातावरण बना है। यह कार्य भामाशाहों और गुरूजनों के अतुलनीय योगदान से ही सम्भव हुआ है। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने बजट में शिक्षा को सर्वाधिक महत्ता प्रदान की है। आवश्यकतानुसार शिक्षकों की व्यवस्था, विद्यालय क्रमोन्नयन और नए विद्यालय खोलने के लिए सरकार की प्रतिबद्घता पूरी तरह पारदर्शी है। सबके सहयोग से शिक्षा के विकास की गति पूरी तरह परवान चढी है, उन्नति में गति और प्रखरता का समावेश हुआ है। इस अवसर पर युवा मामले एवं खेल, प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री मांगीलाल गरासिया ने विशिष्ठ अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए कहा कि दान में त्याग की प्रधानता है जो त्याग करता है वही दान कर सकता है। भामाशाहों ने कमाये हुए धन सम्मति को अच्छे कार्य के लिये दान कर बहुत बडा त्याग किया जो वास्तव में सम्माननीय है। जो शिक्षक सम्मानित हो रहे हैं वे भी दानी हैं क्योंकि उन्होंने विद्यादान किया है। समारोह का परिचय देते हुए प्रमुख शासन सचिव, स्कूल व संस्कृत शिक्षा डा. ललित के पंवार ने बताया कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं तथा विभाग में कार्यरत प्रधानाचार्य स्तर तक के शिक्षाधिकारियों को उनकी अभिनव कार्यशैली और प्रेरणास्पद प्रभावी योगदान के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाता है गत वर्ष तक राष्ट्रीय स्तर पर 341 तथा राज्य स्तर पर 1541 शिक्षकों को सम्मानित किया गया है। इस वर्ष 60 शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है। डा. पंवार ने बताया कि इसी प्रकार जिन भामाशाहों ने शिक्षा की अलख जगाने में अर्थ सहयोग प्रदान कर विद्यालयों को संसाधन सम्पन्न बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर प्रदेश की शैक्षिक संचेतना को मूर्त रूप प्रदान किया उनकी जितनी प्रशंसा की जाये, कम है। जिन दानदाताओं से 5 लाख अथवा उससे अधिक धनराशि का सहयोग प्राप्त होता है उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित करने का प्रावधान ह। 1995 से 2008 तक 914 भामाशाहों एवं 132 प्रेरकों को सम्मानित किया गया है। इनके द्वारा विभाग को 82 करोड 96लाख 9 हजार रूपयों का सहयोग प्राप्त हुआ है। प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि इस वर्ष राज्य स्तर पर 49 दानदाताओं और 20 प्रेरकों को सम्मानित किया जा रहा है इनके द्वारा विभाग को 6 करोड 78 लाख रूपयों का सहयोग प्राप्त हुआ है। यह प्रसन्नता की बात है कि भामाशाहों एवं इनके द्वारा प्रदान की गई राशि में निरन्तर वृद्घि हो रही है। इससे पूर्व मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने सरस्वती की प्रतिमा डा. एस.राधाकृष्णन व भामाशाह की तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारम्भ किया । भामाशाह व शिक्षक सम्मान प्रशस्तियां पुस्तिका का विमोचन किया । शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस राज्य स्तरीय समारोह में शिक्षण क्षेत्र में सराहनीय एवं श्रेष्ठ कार्य करने वाले 60 शिक्षकों को माल्यार्पण कर, शाल ओढा कर श्रीफल, प्रमाणपत्र, प्रत्येक को 11 हजार रुपये का चैक एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले 49 दानदाताओं-भामाशाहों तथा भामाशाह को इस पूनित कार्य के लिए प्रेरित करने वाले 20 प्रेरकों को भी माल्यार्पण कर, शाल ओढा कर श्रीफल, प्रमाणपत्र एवं स्मृतिचिन्ह भेंट कर राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया । शासन सचिव , स्कूल व संस्कृत शिक्षा सियाराम मीणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया इस अवसर पर आयुक्त सर्व शिक्षा अभियान उमेश कुमार, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा भास्कर ए. सावंत, निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा एस.एस.बिस्सा सहित विभागीय अधिकारी शिक्षकगण एवं गणमान्य नागरिक व बालक-बालिकाएं उपस्थित थे।