बीकानेर। सत्य साधना कर्मों के बंधन से मुक्त करती है जब व्यक्ति साधना करता है तो उसका मन निर्मल एवं शांत हो जाता है तथा नये कर्मों के बंधन को वह अपने जीवन में प्रवेश नहीं करने देता साथही साथ जन्म-जन्मों के कर्मों के बंधन से भी मुक्ति पाने का साहसिक कार्य करता है। साधना के पथ पर चल कर वह जान पाता है कि बंधनों ने उसे कहींका नहीं छोडा है। वह मूल्यवान मानव जीवन पाकर भी पिछडा हुआ है बस यही बोध उसे सत्य साधना में श्रद्धापूर्वक लगाए रखता है। निःसंदेह आप सभी जन साहसवान हैं जो अपने मन के भीतर के शोध कार्य में रत एवं अभ्यस्त रहे। शिविर में जो कुछ ग्रहण किया उसे नियमित करते रहें ताकि मन के भीतर बंधनों में पुनः न जाकडे जाएं। साधना का अभ्यास नित्य प्रतिदिन करें यह उद्गार परम पूज्य गुरूदेव जैनाचार्य श्री जिनचन्द्र सूरिजी महाराज ने जैन यति गुरूकुल संस्था की ओर से दस दिवसीय सत्य साधना शिविर के समापन पर व्यक्त किये। इस संबंध में संस्था के सचिव सुरेन्द्र डागा ने जानकारी दी कि सभी साधक-साधिकाओं ने विश्व कल्याण एवं मैत्री की कामना की। शिविर में राजस्थान के अलावा अन्य प्रांतों से साधक-साधिकाओं ने हिस्सा लिया।