प्रदेश में राजकीय सेवा में अनियमित नियुक्ति पर बरसों से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की मख्यमंत्री की घोषणा पिछले नौ माह से कागजों में ही है। पिछले साल 17 जून को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट मीटिंग में निर्णय के बाद मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की थी कि राज्य के सरकारी विभागों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। उनकी इस घोषणा से करीब 70-80 हजार ऎसे अस्थायी कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड गई थी और वे बडी आस से घोषणा के पूरा होने के इंतजार में हैं। गौरतलब है, अस्थायी रूप से नियुक्त इन कर्मचारियों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के परिप्रेक्ष्य में यह मुद्दा बैठक में शामिल किया गया था। कैबिनेट के इस निर्णय का लाभ प्रदेश में 10 अप्रैल 2006 के पहले से काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को मिलना था। राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के परिपेक्ष्य में अनियमित रूप से नियुक्त ऎसे कर्मचारी जो दस वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत है, उनका नियमितिकरण किया जाएगा। इसके लिए विविध सेवा नियमों में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।केबिनेट के निर्णय के बाद मामले को श्रम विभाग को सौंपा गया था। विभाग को विविध सेवा नियम में संशोधन करने और अनियमित रूप से नियुक्त कर्मचारियों की संख्या का आंकलन कर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये गए थे। श्रम विभाग की ओर से फिलहाल पिछले नौ माह से विविध सेवा नियमों में संशोधन का काम ही चल रहा है। कर्मचारियों की संख्या के आंकलन का काम भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।