बीकानेर उद्योग एवं व्यापार मण्डल ने केन्द्रीय बजट पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। व्यापार मण्डल के प्रवक्ता त्रिलोकीनाथ कल्ला ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति ने कहा कि केन्द्रीय वित्तमंत्री ने प्रमुखतया ग्रामीण एवं कृषि विकास तथा आधारभूत संरचना के निर्माण पर ध्यान दिया गया है। नरेगा कार्यक्रम का खर्च बढाकर 39000 करोड कर दिया गया है जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इस बजट की प्रमुख विशेषता यह रही कि पहली बार कुल बजटीय खर्च 10,00,000 करोड रुपये पार कर गया जो कि हमारे स्वतंत्र भारत में पहले बजट में मात्र 193 करोड रुपये था। बजट मे वितमंत्री ने राजस्थान में वस्त्र उद्योग के लिए एक मेगा क्लस्टर खोलने की भी घोषणा की जो कि स्वागत योग्य है।
बजट में फ्रिज बेनीफिट टैक्स तथा कामोडिटी ट्राजेक्शन टैक्स को खत्म करने की भी घोषणा की गई है जिससे कि व्यापारियों को काफी राहत मिलेगी। गुडस् एवं सर्विसेज टैक्स को 2010 से लागू करने की घोषणा की गई है जो कि केन्द्र एवं राज्य स्तर पर द्विस्तयीय होगी। व्यक्तिगत आयकर की सीमा को 1.50 लाख से बढाकर 1.60 लाख कर दिया गया है इसी तरह महिलाओं एवं सीनियर सिटीजन की छूट को भी क्रमशः 10000 एवं 15000 रुपये से बढा दी गई है। व्यक्तिगत आयकर में 1000000 रुपये से ज्यादा की आय पर 10 प्रतिशत सरचार्ज को हटा दिया गया है।
मिनिमन आल्टरनेट टैक्स की दर 10 प्रतिशत से बढाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है इससे कम्पनी कर नहीं देने वाली कम्पनी लेकिन अपने खातों में लाभ दिखाने वाली कम्पनियों को इससे नुकसान होगा। वितमंत्री ने राजनीतिक पार्टी को चंदा देने वाली कम्पनी को 100 प्रतिशत व्यापार खर्च के रूप में छूट देने की बात की गई है जो कि राजनीति के शुद्धिकरण में सहायक होगी। वितमंत्री ने आयकर कोड को अगले 45 दिनों में लाने की घोषणा की है जिसमें आयकर के सरलीकरण की तरफ कदम बढाया जायेगा।
बजट में सिक्योरिटी टांन्जेक्शन टैक्स को हटाने की आशा थी जिसको वितमंत्री ने निराश किया है तथा केपिटल मार्केट को इससे काफी निराशा हुई है। व्यक्तिगत आयकर की सीमा को भी 1.50 लाख से बढाकर 2.00 लाख करने की आशा थी लेकिन इसमें केवल 10,000 रुपये की बढोतरी नाकाफी है ?
इसके साथ ही लघु एवं सूक्ष्म उद्योग को इस बजट में अप्रत्यक्ष कर एवं ब्याज दरों मे कमी की आशा थी जिससे कि मंदी के इस दौर में प्रतिस्पर्धा में टिक सके लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।
कुल मिलाकर अगर प्रारंभिक तौर पर बजट का विवेचन किया जाए तो ऐसा लगता है कि वितमंत्री ने कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा आधारभूत संरचना के निर्माण पर अपना ध्यान दिया है तथा इससे भारत के आर्थिक विकास दर को 9 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक ले जाने में सहायता मिलेगी।