निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामीश्री पुण्यानन्द गिरिजी महाराज द्वारा छोटीकाशी के नाम से जानी जाने वाली पावन धरा मे श्रीमद् देवी भागवत महापुराण की रसधारा बहायेंगें।
१२ अक्टुबर से २० अक्टुबर तक चलने वाली इस कार्यक्रम मे १०१ विद्वान पण्डितों द्वारा श्रीमद् देवी भागवत का पारायण तथा दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन पाठ करेंगे तथा इसमे २०० यजमानों द्वारा अपने अपने पंडितो के माध्यम से प्रतिदिन मां देवी की पूजा अर्चना करेगें। स्वामीजी ने बताया कि भागवत कथा समय प्रातः ९ बजे से १२ बजे तक तथा ३ बजे से सायं ६ बजे तक रखा गया है।
आज हुई प्रेस वार्ता मे महामण्डलेश्वर स्वामीश्री पुण्यानन्दजी ने बताया कि यह श्री मद्देवी भागवत की कथा यदा कदा ही देखी जाती है। वैदिक सनातन धर्म सदा से प्रकृति अपनी कि्रयाशलीता से सृष्टि मे नित्य नवीन परिवर्तन लाकर विश्व का श्रृंगार करती है। उन्होने कहा कि यह माना जा सकता है कि ईश्वर जगत का पिता है मूल प्रकृति जगन्माता और व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास मे माता का योगदान पिता से भी ज्यादा माना एव देखा जाता है। अतः मूल प्रकृति पराम्बा भगवति की आराधना का यह विश्ष्ठि शारदीय नवरात्र एवं वासन्त नवरात्र का शास्त्र ने निर्धारण किया। इसी को लक्ष्य रखकर कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
इस कार्यक्रम को सुचारू से संचालन के लिये स्वामीजी ने श्रीमद्देवी भागवत नवाह्न पारायण एवं ज्ञानयज्ञ समारोह समिति का गठन किया है जिसमे डॉ बी.डी.कल्ला को संरक्षक, पंडित मोहनलाल व्यास (नापासर) को अध्यक्ष, कन्हैयालाल कल्ला को संयोजक, पंडित जुगलकिशोर ओझा(पुजारीबाबा) को सहसंयोजक, माणिकचन्द टावरी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भैरूरतन किराडू को सचिव, भागीरथ चांडक को सह सचिव तथा जगत नारायण कल्ला व आनन्द कुमार बिस्सा को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इस कार्यक्रम के प्रबन्धक आश्रम के प्रबन्धक स्वामी प्रेमानन्द गिरि जी ब्रहमानन्द गिरि होगें।
महामण्डलेश्वर पुण्यान्नदजी ने बताया कि यह कार्यक्रम नेपाल के पोखरा मे, झून्झनू तथा नापासर मे आयोजित करवा चुके है तथा पहली बार बीकानेर मे होने जा रहा है।