जयपुर, ६ नवम्बर। जयपुर विद्युत वितरण निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री आर.जी. गुप्ता ने कहा हैकि बिजली चोरी की विषबेल को समाज में फैलने से रोकने के लिए यह जरूरी है कि बिजली चोरी का अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। श्री गुप्ता मंगलवार को यहां विद्युत भवन में आयोजित बिजली चोरी नियंत्रण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि निगम का कोई कर्मचारी या अधिकारी बिजली चोरी के अपराध में सहयोग करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही करने में किसी तरह की ढिलाई न बरती जाये। कार्यशाला में निगम के विभागीय और सतर्कता अभियान से जुडे अधिकारी उपस्थित थे।
श्री गुप्ता ने कहा कि फीडर सुधार कार्यक्रम का लक्ष्य बिजली छीजत में कमी लाकर उपभोक्ताओं को पर्याप्त एवं गुणवत्तापरक बिजली उपलब्ध कराना है। बिजली एवं बिजली सामान की चोरी इस अभियान के परिणामों में अवरोध पहुंचाती है। अतः फीडर सुधार कार्यक्रम के असर को स्थाई बनाने के लिए बिजली चोरी की घटनाओं को रोकना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए विभाग की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों की अनुपालना यदि ठीक से नहीं की जाती है तो यह भी चोरी में लिप्त होने के सामान ही अपराध है।
श्री गुप्ता ने कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों से कहा कि कार्यशाला की सार्थकता के लिए जरूरी है कि इसमें भाग ले रहे अधिकारी बिजली चोरी की घटनाओं और उसके लिए अपनाए जा रहे तौर-तरीकों पर परस्पर विचार-विमर्श कर सुदृढ रणनीति तैयार करें।
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा कि जयपुर डिस्कॉम ने इस वर्ष छीजत में साढे चार फीसदी कमी की है। छीजत में कमी तकनीकी कारणों से संभव है, लेकिन इस कमी को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सतर्कता अभियान सघन रूप से चले और बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ कार्यवाही हो। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से अधिकतम १२ प्रतिशत बिजली छीजत ही संभव है। यदि इससे अधिक छीजत होती है तो उसका निश्चित तौर पर एक मात्र कारण बिजली चोरी ही है।
कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सतर्कता श्री हैदर अली जैदी ने कहा कि बिजली चोरी को रोकना राष्ट्रीय सेवा है और पुलिस को सक्रियता से इस अपराध के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल बिजली चोरी जांच में २९ फीसदी, चोरी के मामले पकडने में २४ फीसदी तथा जुर्माना निर्धारण एवं वसूली में १९ फीसदी की बढोतरी दर्ज की गई है।
कार्यशाला में सतर्कता अभियान से जुडे इंजीनियरों और पुलिस अधिकारियों ने फील्ड के अनुभव के आधार पर परस्पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान मीटर बनाने वाली कम्पनियों के विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रोनिक और पुशफिट मीटर की विशेषताओं के बारे में विस्तार से बताया।