खनिज सम्पदा की दृष्टि से देश में अगुवा राजस्थान में वैज्ञानिक दोहन, नियमों एवं प्रक्रिया के सरलीकरण तथा राजस्व वसूली के ठोस प्रयासों के परिणाम सामने आये हैं। एक तरफ खनिज आधारित उद्योगों को बढावा मिला है वहां राजस्व संग्रहण में अप्रत्याशित बढोतरी दर्ज की गई है।
जयपुर, 6, 2007 खनिज सम्पदा की दृष्टि से देश में अगुवा राजस्थान में वैज्ञानिक दोहन, नियमों एवं प्रक्रिया के सरलीकरण तथा राजस्व वसूली के ठोस प्रयासों के परिणाम सामने आये हैं। एक तरफ खनिज आधारित उद्योगों को बढावा मिला है वहां राजस्व संग्रहण में अप्रत्याशित बढोतरी दर्ज की गई है। वर्ष २००२-०३ में मात्र ४४९.३७ करोड के मुकाबले वर्ष २००६-०७ में ११९६.५२ करोड रुपये की राजस्व वसूली एक कीर्तिमान के रूप में देखी जा सकती है। खान योजना को स्वीकृत करने के अधीक्षण खनि अभियंताओं को अधिकार, वन सीमा से २ कि.मी. अधिक की दूरी पर खनन पट्टे के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हटाने तथा क्वार्ट्ज एवं फेल्सपार के सीधे खनन पट्टे स्वीकृत करने जैसे निर्णयों के सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं।
गत चार वर्षों के दौरान खनिज संपदा के विवेकीकृत एवं वैज्ञानिक दोहन के लिए किये गये प्रयासों का परिणाम है कि सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन के नये भण्डार सिद्ध किये गये। चित्तौडगढ, जैसलमेर, नागौर एवं झुंझुनू जिलों में सिद्ध भण्डारों के परिणाम स्वरूप सीमेंट संयंत्रें की स्थापना के लिए २६ क्षेत्र अनारक्षित घोषित किये गये। इसी तरह बीकानेर, नागौर एवं बाडमेर जिलों में लिग्नाइट के विशाल भण्डारों के कारण तापीय विद्युत गृहों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। बाडमेर जिले के कपूरडी में एक हजार मेगावाट एवं बीकानेर के गुडा पूर्वी क्षेत्र में १२५ मेगावाट क्षमता के विद्युत उत्पादन संयंत्र की स्थापना का कार्य प्रारंभ हो चुका है। गिराल (बाडमेर) में तापीय विद्युत गृह में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है जबकि बरसिंगसर (बीकानेर) में २ग१२५ मेगावाट क्षमता के संयंत्र की स्थापना की कार्यवाही प्रगति पर है। धौलपुर, जोधपुर तथा झालावाड जिलों में परतदार सैण्डस्टोन तथा बाडमेर और जैसलमेर जिलों में ब्ल केबल ग्रेनाइट की उपलब्धता प्रमाणित की गई है।
पर्यावरण संरक्षण पर बल
खानों एवं उसके आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने के लिए विशेष प्रयास किये गये हैं। इसके लिए पर्यावरण मित्र खनन योजना लागू कर गत चार वर्षों में १५ लाख से अधिक पेड लगाये गये। इन पेडों की सार संभाल में खनन पट्टाधारियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। राज्य के सभी ३२ जिलों में पर्यावरण मित्र संगोष्ठियों का आयोजन करने के अलावा मलबे को निश्चित स्थान पर डलवाने की व्यवस्था की गई है। अवैध खनन की रोकथाम
अवैध खनन की रोकथाम के लिए उच्च स्तरीय प्रयासों के तहत अतिरिक्त मुख्य सचिव (आधारभूत) की अध्यक्षता में टास्क फोर्स तथा जिला एवं उपखंड अधिकारियों की अध्यक्षता में समिति का गठन कर प्रभावी कार्यवाही की गई। गत चार वर्षों के दौरान ४८२ प्राथमिकी दर्ज कराकर ४ करोड ८३ लाख ४६ हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया गया।
इसके अलावा प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर बकाया आवेदन पत्रें का त्वरित निस्तारण किया गया। चार वर्षों के दौरान एक लाख ८ हजार ८८० आवेदन पत्रें मय क्वेरी लाइसेंसों का निस्तारण किया गया। राज्य में खनिज उपलब्धता वाले ६२२ संभावित क्षेत्रें एवं खनन क्षेत्रें की भूमि का किसी अन्य उपयोग रोकने की दृष्टि से ५ हजार १८२ खनन पट्टे, १३ हजार २७७ क्वेरी लाइसेंस क्षेत्रें की राजस्व रिकार्ड में अमल दरामद कराई गई। श्रम कल्याण की दृष्टि से खानों में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं सामूहिक बीमा योजना का लाभ १.४० लाख श्रमिकों को दिया गया।
आर.एस.एम.एम.लि.
कम्पनी ने गत चार वर्षों के दौरान उत्पादन, व्यवसाय एवं सामाजिक सरोकारों की दृष्टि से उल्लेखनीय कार्य किया है। आलोच्य अवधि में ५७० करोड रुपये से अधिक व्यवसाय के साथ लाभ, प्रति व्यक्ति उत्पादकता एवं प्रति शेयर अर्जन में वृद्धि दर्ज की गई। पवन ऊर्जा क्षेत्र में २२८ करोड के निवेश के साथ ४२.३० मेगावाट उत्पादन क्षमता अर्जित की गई। वर्ष २००६-०७ में ४.६७ लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट का उत्पादन और जिप्सम की २८.५१ लाख मीट्रिक टन बिक्री की गई। लाइम स्टोन एवं उच्च श्रेणी का राक फास्फेट आपूर्ति के क्षेत्र में भी कम्पनी की उपलब्धियां उत्साहजनक रही। रतनजोत से बायोडीजल के उत्पादन एवं कार्बन डाई आक्साइड में अर्जित कमी के आधार पर प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी कम्पनी सफल रही है। कम्पनी ४०५ करोड रुपये के निवेश से कपासन में डी.ए.पी. संयंत्र की स्थापना कर रही है।
सामाजिक सरोकारों की दृष्टि से भी कम्पनी की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। चिकित्सा, खेलकूद, पर्यावरण, पेयजल, शिक्षा एवं सामुदायिक विकास कार्यों में कम्पनी आगे बढकर योगदान कर रही है।