राजस्थान सहित पांच राज्यों के सांसदों का संसद परिसर में
6 Dec
2007 राष्ट्रपिता की मूर्ति के समक्ष धरना प्रदर्शन नई राष्ट्रीय खनिज नीति को अंतिम रूप देने से पूर्व प्रधानमंत्री पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वार्ता करें
जयपुर, ६ दिसम्बर। राजस्थान सहित देश के पांच खनिज प्रधान राज्यों के सांसदों ने कहा है कि नई राष्ट्रीय खनिज नीति में राज्यों के अधिकारों पर कुठाराघात और अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। साथ ही इसे अंतिम रूप देने से पहले केन्द्र को चाहिए कि राजस्थान सहित देश के खनिज प्रधान पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ गहन विचार-विमर्श कर उनके सुझावों को इसमें शामिल किया जाये।
सांसदों ने बुधवार को नई दिल्ली में संसद परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना और प्रदर्शन कर मांग की कि प्रधानमंत्री इस संबंध में पांच राज्यों राजस्थान, उडीसा, छत्तीसगढ, झारखंड, कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के साथ वार्ता करे और उनके सुझावों को शामिल करने के बाद ही इस संबंध में कोई बिल अधिनियम को संसद में पेश किया जाए। उन्होंने बताया कि उक्त राज्यों के मुख्यमंत्री राष्ट्रीय खनिज नीति के संबंध में गठित किए गए मंत्रीमंडलीय समूह के अध्यक्ष और केन्द्रीय गृहमंत्री श्री शिवराज पाटिल के साथ गत अगस्त माह में हुई बैठक में अपने सुझाव प्रस्तुत कर चुके हैं उन्होंने कहा कि खनिज प्रधान राज्यों की आर्थिक प्रगति, गरीबी उन्मूलन और बेरोजगारी की समस्या के समाधान की दृष्टि से नई खनिज नीति के दूरगामी परिणाम होंगे। इसलिए यह जरूरी है कि केन्द्र सरकार राज्यों के हितों की रक्षा करें और उनकी अनदेखी नही करें तथा ऐसी सर्वमान्य नीति बने जिससे देश के संघीय ढांचे को किसी तरह की आंच नहीं आए। सांसदो ने आशा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री विहंगम दृष्टिकोण अपनाते हुए खनिज प्रधान राज्यों के साथ समुचित न्याय करेगें।
सांसदों ने बताया कि राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सहित उक्त राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने खनिज प्रधान राज्यों की चिंताओं और शंकाओं के साथ ही अपने सुझावों से केन्द्रीय गृहमंत्री को जब अवगत करवाया तब यह आश्वासन दिया गया था कि वे इसे प्रधानमंत्री और केन्द्रीय मंत्रीमंडल के समक्ष रखेंगे और यह प्रयास करेंगे कि राज्यों के हितों की रक्षा होने के साथ ही उनके अधिकारों को किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे।
धरने में शामिल उदयपुर के सांसद श्रीमती किरण माहेश्वरी ने बताया कि केन्द्र को मार्बल आयात नीति से राजस्थान जैसे मार्बल प्रधान उत्पादक प्रदेश को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि मार्बल आयात नीति को लागू करने से पहले दुर्भाग्य से संबंधित राज्य सरकारों को विश्वास में नहीं लिया गया। फलस्वरूप राजस्थान जैसे प्रदेश को इसका खामियाजा भुगतना पड रहा है और कुछ चुनिंदा आपात लाइसेंसधारियों को ही इसका फायदा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि नई खनिज नीति और मार्बल आयात नीति आदि पर संसद में व्यापक चर्चा की जानी चाहिए और सभी के सुझावों को शामिल करने के बाद ही इन्हें लागू किया जाना चाहिए।
धरना देने वाले सांसदों में राजस्थान के श्री रघुवीर सिंह कौशल, श्री सुभाष महरिया, श्रीमती किरण माहेश्वरी, श्री राम सिंह कसवां, श्री राम स्वरूप कोली, श्री महावीर भगोरा, श्री धन सिंह रावत, श्री दुष्यंत सिंह, श्री रासा सिंह रावत और श्री वी.पी.सिंह शामिल थे।