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शहादत को सलाम

6 Dec 2007
खनिज सम्पदा की दृष्टि से देश में अगुवा राजस्थान में वैज्ञानिक दोहन, नियमों एवं प्रक्रिया के सरलीकरण तथा राजस्व वसूली के ठोस प्रयासों के परिणाम सामने आये हैं। एक तरफ खनिज आधारित उद्योगों को बढावा मिला है वहां राजस्व संग्रहण में अप्रत्याशित बढोतरी दर्ज की गई है।
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जयपुर, 6, 2007 भारतीय सेना  में राजस्थान की भागीदारी संख्या की दृष्टि से ही नहीं गुणात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। झुंझुनूं, सीकर, जोधपुर, भरतपुर, नागौर जिलों का नाम सैनिकों की संख्या की दृष्टि से अगुवा माना जाता है। देश की सीमा की पहरेदारी हो या आंतरिक या बाह्य खतरा राजस्थान के वीर सपूतों ने सदैव इस माटी को गौरवान्वित किया है। युद्ध हो या आतंककारियों से मुकाबला सदैव प्राणों को हथेली में रखकर कर्तव्य की बलिवेदी पर यहां के जाबांजों ने हँसते-हँसते प्राणों की आहूति दी है। संसद पर हमला हो, जम्मू-कश्मीर या देश के किसी अन्य कोने में आतंकवादी घटना राजस्थान का एक न एक सपूत शहादत के साथ इस माटी को गौरवान्वित करता रहा है। ऐसे जांबाजों के कल्याण एवं उनके परिजनों के सम्मान के लिए राज्य सरकार ने आगे बढकर काम किये हैं।
मुख्यमंत्री के रूप में श्रीमती वसुन्धरा राजे ने उदारभाव से सैनिकों के कल्याण के लिए किसी भी काम को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोडी है। पेंशन हो या उनके पुनर्वास का मसला हर कार्य में राज्य सरकार ने आगे आकर मदद को अपना धर्म माना है।
सैनिकों एवं पूर्व को राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाएं इस प्रकार हैं ः-
द्वितीय विश्व युद्ध के नोन पेंशनर पूर्व सैनिकों को दी जा रही ३०० रुपये प्रतिमाह की पेंशन तथा उनकी विधवाओं को दी जा रही ६०० रुपये प्रतिमाह की पेंशन को बढाकर एक अप्रेल, २००६ से ८०० रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इससे द्वितीय विश्व युद्ध के कुल ८ हजार ९१४ नोन पेंशनर पूर्व सैनिक एवं उनकी विधवाएं लाभान्वित हुई हैं।
परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र, सेना, वायु, नौ सेना मेडलधारकों को पूर्व में दी जा रही नकद राशि १० गुना बढा दी गई है। इसी प्रकार शौर्य के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक, शौर्य के लिए पुलिस पदक आदि मैडल धारकों को पूर्व में दी जा रही कुल नकद राशि बढाकर क्रमशः एक लाख व ५० हजार रुपये कर दी गई है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र के फैज-।। में ४ हजार १९७ पूर्व सैनिकों को प्रत्येक को २५ बीघा सिंचित भूमि आवंटित की गई है।
प्री-कारगिल शहीदों के बच्चों को कारगिल पैकेज की भांति स्कूल स्तर पर वित्तीय वर्ष २००५-०६ में १८०० रुपये एवं कॉलेज स्तर पर ३६०० रुपये छात्रवृति स्वीकृत की गई।
एक अप्रेल, १९९९ के पश्चात शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को आउट ऑफ टर्न विद्युत कनेक्शन का प्रावधान किया गया है जिससे ४० परिजन लाभान्वित हुए हैं।
सैनिक विश्राम गृह डीडवाना (जिला नागौर) में खोला गया। सात जिला सैनिक कल्याण कार्यालय खोले गये जो वर्तमान में कार्यरत हैं। इनमें भीलवाडा, टोंक, झुंझुनूं जिले के चिडावा कस्बे में एवं बहरोड (अलवर), शेरगढ (जोधपुर), नीमकाथाना (सीकर) एवं डीडवाना (नागौर) में खोले गये।
स्थाई विकलांग सैनिक जिनकी विकलांगता ४० प्रतिशत या उससे अधिक है और जो मेडिकल बोर्डेड आउट हैं, नियोजन के पात्र बनाये गये। मेडिकल कॉलेजों में डिफेन्स कोटे की २८ सीटों में से ९ सीटों पर युद्ध शहीदों के आश्रितों को प्रदेश दिलाया गया है। इसी प्रकार ३१ मार्च १९९९ से पूर्व की ८९६ युद्ध विधवाओं को सम्मान भता के रूप में ७५० रुपये प्रतिमाह के हिसाब से दिया जा रहा है।



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