भारत का सांस्कृतिक दूत बना सा रे गा मा पा
7 Jan
2008 भारत में रहकर हमारी नई पीढी के लोग भले ही पश्चिमी संगीत और पश्चिमी कलाकारों के प्रति दीवनगी जताएं लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय संगीत का जादू सात समंदर पार भी सिर चढ़कर वोलता है।
भारत में रहकर हमारी नई पीढी के लोग भले ही पश्चिमी संगीत और पश्चिमी कलाकारों के प्रति दीवनगी जताएं लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय संगीत का जादू सात समंदर पार भी सिर चढ़कर वोलता है। यह बात सिध्द हुई है ज़ी टीवी के संगीत कार्यक्रम सा रे गा मा पा के प्रतियोगियों के अमरीका, कनाडा के 45 दिन के व्यस्त दौरे के दौरान। फिजी, कनाडा से लेकर अमरीका के ब़ड़े बड़े शहरों में आयोजित हुए कार्यक्रमों में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। सुनने वालों में भारतीय मूल के लोग ही नहीं बल्कि वहाँ के स्थानीय रहवासी भी बड़ी संख्या में होते थे। लेकिन लोग केवल गाने सुनकर ही खुश नहीं हो जाते थे बल्कि वे अपने इन चहेते युवा कलाकारों से मिलना चाहते थे, बात करना चाहते थे और यहाँ तक कि अपने साथ शॉपिंग पर लेजाकर उनकी पसंदीदा महंगी से महंगी चीजें तक खरीद कर देते थे। लोगों की दीवानगी काआलम यह था कि उन्होंने इस कार्यक्रम में भाग लेने गए सभी गायक-गायिकाओं को उपहारों से लाद दिया। जगह-जगह भारी बर्फबारी होने के बावजूद लोग इनको सुनने के लिए उमड़ पड़ते थे।
आगे है : हेलीकॉप्टर से टकराए और कार खाई में गिरी
इसे सा रे गा मा पा की लोकप्रियता कहें कि लोगों की भारतीय फिल्म और संगीत के प्रति दीवानगी, कार्यक्रम में आने वाले लोग इन सभी कलाकारों को उनके द्वारा सा रे गा मा पा के दौरान गाए गए गीत के वोलों से ही जानते थे। हर श्रोता अपने पसंदीदा कलाकार से उसके द्वारा गाया गया गीत सुनने को ललायित रहता था। इस कार्यक्रम की खासियत यह रही कि कहीं भी कार्यक्रम के संचालन के लिए कोई एंकर या संचालक नहीं था। सभी कलाकार एक दूसरे को उसके खास परिचय के साथ आमंत्रित कर माईक उसे सौंप देते थे।
मंच पर सबसे पहले हरप्रीत देओल का आगमन होता था और जाने के पहले सुमेधा को आमंत्रित करता था। इसके बाद सुमेधा मुसर्रत को, मुसर्रत जुन्नैद को, जुन्नैद मौली दवे को और मौली दवे दिवाकर को, दिवाकर राजा हसन को और राजा हसन सबसे आखिर में ओनिक धर को आमंत्रित करता था। हरप्रीत से लोग फिल्म पार्टनर का गीत ' काँवा काँवा.....' सुनने की फरमाईश करते थे तो सुमेधा से खामोशी फिल्म के गीत ' बाहों के दरमियाँ...' और ओंकारा फिल्म के गीत 'बीड़ी जलाई ले....' के गीत की फरमाईश करते थे। पाकिस्तान के मुसर्रत के आने पर लोग नमस्ते लदंन का गीत 'कहने को अपने साथ दुनिया चलती है...' और नुसरत फतेह अली खाँ साहब द्वारा गाए गीतों की फरमाईश करते थे। पाकिस्तान के ही जुन्नैद से उनके द्वरा गाए गए प्रायवेट एल्बम के गीत और 'दूरी' फिल्म का गीत 'लिखे जो खत तुझे...' की फरमाईश की जाती थी। मौली दवे जो खुद अमरीका की ही है, उनको लेकर अमरीका में ज़बर्दस्त दीवानगी है और जब वो 'मय्या मय्या...' गाती थी तो पूरा श्रोता समूह मानो पगला जाता था। राजा हसन' टूटा टूटा एक परिंदा...', 'तूने क्या कर डाला, मर गया मैं...' जैसे गीतों से लोगों के चहेते बने हुए थे। राजा हसन जब किशोर कुमार के गाए गीत पर अपनी कमर लचकाता था तो पूरा माहौल लोगों के हर्षोन्माद से गूंज उठता था। सबसे अंत में सा रे गा मा पा चैलेंज 2007 के विजेता ओनिक धर 'तुमको पाया है तो कैसे खोया हुआ हूँ...' प्रस्तुत करके क्षोता समुदाय को मंत्र-मुग्ध कर देते थे। हर जगह सबके आकर्षण का केंद्र होता था नैत्रहीन दिवाकर। दिवाकर द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले गीत 'तड़फ तड़फ कर इस दिल से आह निकलती है...' में मानो उसकी अपनी ही व्यथा व्यक्त होती थी। अमरीका में सैनफ्रांसिस्को में इस कार्यक्रम के आयोजक दीपक मेहता ने तो दिवाकर का गीत सुनने के बाद भरे गले से कहा कि ''मैं कभी किसी बात पर नहीं रो पाता हूँ मगर दिवाकर के शब्दों ने मेरे अंदर भावना का ऐसा सैलाब पैदा कर दिया कि मैं जिंदगी में पहली बार जी भरकर रोया।''
इन सभी कलाकारों को लेकर लोगों की दीवानगी का आलम यह था कि लोग अपनी व्यस्ततम दिनचर्या और कमकाज के बावजूद एक से दूसरे शहर में महंगे टिकट खरीदकर कार्यक्रम को सुनने के लिए सपरिवार पहुँच जाते थे।
न्यू जर्सी (जिसे अमरीका में छोटा भारत के रूप में जाना जाता है) वहाँ पर आयोजित इस कार्यक्रम को सुनने के लिए न्यूयॉर्क से 1200 गाडियाँ आई, जबकि इसके पहले यह कार्यक्रम न्यूयार्क में हो चुका था। इसी तरह डलॉस में हुए कार्यक्रम को दोबारा सुनने के लिए ह्यूस्टन से हजारों लोग पाँच घंटे की दूरी तय करके पहुँचे।
हेलीकॉप्टर से टकराए और कार खाई में गिरी
सभी के लिए सबसे रोमांचक और ज़िंदगी का यादगार मौका था लॉस एंजलिस (जिसे फिल्मी दुनिया में हालीवुड कहा जाता है) में हजारों एकड़ मे फेले यूनिवर्सल स्टुडिओ में घूमने का। हालीवुड की एक से एक खतरनाक और रोमांचक फिल्म की शूटिंग इसी स्टुडिओ में होती है। यहाँ पर सभी ने हैलीकॉप्टर से टकराने से लेकर कार के खाई में गिरने और अंधेरी सुरंग में भटकने तक का मजा लिया। सबकुछ हकीकत में हुआ मगर किसी को खरोंच तक नहीं लगी। सभी ने यहाँ विशाल परिसर में फैले जुरासिक पार्क की भी सैर की।
(लेखक श्री पंकज बागरेचा इस दौरे में इन कलाकारों के साथ गए थे)