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मानगढ धाम दुनिया में गौरव पाएगा - मालवीया
8 Feb 2009

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने मानगढ धाम पर किया साहित्यकार घनश्याम प्यासा की पुस्तक का विमोचन


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बांसवाडा, जनजाति क्षेत्रीय विकास, जन अभियोग निराकरण, तकनीकी एवं अभियांत्रिकी शिक्षा मंत्री महेन्द्रजीतसिंह मालवीया  ने कहा है कि आजादी के संघर्ष में शहीद हो गए पन्द्रह सौ से दो हजार आदिवासियों की शहादत स्थली  मानगढ धाम शिक्षा और जागरुकता की कमी की वजह से अब तक भले ही इतिहास में यथोचित स्थान प्राप्त नहीं कर पाया है लेकिन अब यह दुनिया में ऐतिहासिक यादगार बनने की ओर अग्रसर है और इसे कोई नहीं रोक सकता।
जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री महेन्द्रजीतंसंह मालवीयाने बांसवाडा से सत्तर किलोमीटर दूर राजस्थान और गुजरात के सरहदी पहाड पर अवस्थित ऐतिहासिक मानगढ धाम पर मानगढ बलिदान शताब्दी और स्वतंत्रता सेनानी गोविन्द गुरु के 150 वें जन्म दिवस स्मृति समारोह के अन्तर्गत समारोह समिति तथा दयानंद सेवाश्रम बांसवाडा की ओर से आर्य परिवार संस्था कोटा के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय समारोह के अंतिम दिन रविवार को आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।
समारोह में मानगढ धाम के महन्त नाथूराम भगत, पं. वेदप्रिय शास्त्री, भजनोपदेशक पं. दिनेशदत्त आर्य, दयानंद सेवाश्रम दिल्ली  के अध्यक्ष वेदव्रत मेहता एवं महामंत्री प्रेमलता शास्त्री, मंत्री ईश्वर
नाट्यकृति ’’मोर्चा मानगढ‘‘ पुस्तक का  विमोचन
जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री मालवीया ने समारोह में साहित्यकार घनश्याम प्यासा(गढी) की कृति मोर्चा मानगढ(ऐतिहासिक नाटक) का विमोचन किया। इसमें मानगढ धाम की गाथा को वास्तविक ऐतिहासिक पात्रों को केन्द्रीय भूमिका में रखते हुए वर्णित किया गया है। कृति का मुद्रण गंगा प्रकाशन द्वारा हुआ है। मालवीया ने मानगढ धाम पर प्रकाशित कृति को संदर्भ एवं नई पीढी तक ज्ञान संवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथा संग्रहणीय बताया और इसके लिए साहित्यकार घनयश्याम प्यासा को बधाई देते हुए कहा कि आंचलिक विषयों पर इतिहास और साहित्य लेखन के प्रयासों को और अधिक व्यापकता दी जानी चाहिए।
दुनिया भर में पहचान कायम होगी मानगढ की 
मालवीया ने कहा कि अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में मानगढ अग्रणी अभियान था जिसमें मानगढ की धरती से अंग्रेजों के खिलाफ सशक्त बिगुल बजा जिसम 1500 से 2000 निहत्थे आदिवासी शहीद हो गए। आजादी की अलख जगाने वाली इस माटी के कण-कण में शौर्य, देशभक्ति और बलिदान की ऊर्जा समाहित है जो सदियों तक प्रेरणा का संचरण करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि आज किसी भी वजह से एक की मौत हो जाती है तो इतिहास बन जाता है जबकि मानगढ धाम में सैकडों लोग शहीद हो गए और इतना बडा नरसंहार हुआ कि उनके परिजन शहीदों का दाह संस्कार तक नहीं कर सके। इसका मूल कारण उन दिनों शिक्षा और जागृति का अभाव था। ऐसा होता तो जलियांवाला बाग से भी बडी यह घटना दुनिया में आजादी पाने के सबसे बडे हत्याकाण्ड के रूप में इतिहास में स्थान पा जाती। उन्होंने बताया कि इस घटना में हुई गोलीबारी के कारतूस आज भी देखे जा सकते हैं।
 जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने कहा कि मानगढ धाम के लिए अब सार्थक, ठोस और व्यापक प्रयास किए जाएंगे और इसमें धन की कोई कमी आडे नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि मानगढ धाम की सुरक्षा और देखभाल हर व्यक्ति का धर्म है और इसके लिए लोगों को जागरुक रहना चाहिए।
पूरवजों का चीरा है शहीद स्मारक
जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री ने आदिवासी क्षेत्रों में पूरवजों की स्मृति में स्थापित और पूजित सिरा बावजी(चीरों) की चर्चा की और मानगढ धाम पर स्थापित शहीद स्मारक को शहीदों की स्मृति का बडा सिरा बताते हुए लोगों से कहा कि वे यहां आकर मानगढ धाम के शहीद पूरवजों के प्रति श्रद्धान्जलि अर्पित करने के साथ ही इनसे आशीर्वाद प्राप्त करें और इनकी आत्माओं की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करें। पूरवजों के आशीर्वाद से हम नई शक्ति और ताकत प्राप्त करते हैं।
धूंणियां और धामों को बनाएं लोक चेतना केन्द्र
उन्होंने कहा कि मानगढ धाम के स्थलों की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही धाम पर पक्का पाण्डाल स्थापित किया जाएगा ताकि समारोहों और धार्मिक-साामजिक आयोजनों के लिए टेन्ट की व्यवस्था नहीं करनी पडे।
इसके अलावा आदिवासी क्षेत्र भर में संत-महात्माओं और भगतों की धूंणियों पर गोविन्द गुरु के नाम से बडी संख्या में सामुदायिक भवन बनाए जाएंगे।
उन्होंने इन धूंणियों और धामों को कुरीतियों के निवारण के लिए संकल्प लेने के साथ ही संस्कार, शिक्षा और चेतना के केन्द्रों के रूप में स्थापित किए जाने पर जोर दिया और लोगों से कहा कि वे इनका पूरा-पूरा उपयोग करते हुए समाज को नई दिशा और तरक्की की दृष्टि दें। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति कोचाहिए कि वह मूल्यांकन करे तथा अच्छे लोगों को हरसंभव सहयोग व सम्बल प्रदान करे।
डॉ. कुसुम की कविता ने मन मोहा
समारोह में जयपुर से आए डॉ. नरेन्द्र शर्मा ’कुसुम‘ ने मानगढ धाम और गोविन्द गुरु पर केन्दि्रत माधुर्यपूर्ण काव्य रचना ने मन मोह लिया। डॉ. शर्मा ने तरन्नुम में कविता पेश करते हुए मानगढ और गोविन्द गुरु की महिमा का बखान किया।
आरंभ में स्वागत भाषण आयोजन समिति के अध्यक्ष समाजसेवी खेमराज गरासिया ने दिया। इस अवसर पर प्रेमलता शास्त्री, वेदव्रत मेहता, आनंदपुरी पंचायत समिति की प्रधान श्रीमती सुभद्रा गरासिया, समाजसेवी सरदार शमशेर सिंह, पुरुषोत्तम आर्य,
आरंभ में अतिथियों का स्वागत नानकराम पारगी, रकमचन्द, नरेश पारगी,   खेमराज गरासिया, मोतीसिंह डोडियार, सुखलाल, सोमेश्वर पटेल आदि ने पुष्पहारों से किया। समारोह का संचालन समिति के संयोजक जीववर्द्धन शास्त्री ने किया।




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