श्रीगंगानगर, ८ जुलाई । रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिये जनजागृति जरुरी है और इसमें मीडिया का अहम रोल है। आज भी ८० प्रतिशत लोग रक्तदान से कतराते है। यह विचार राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ की और पुरोहित ब्लड बैंक तत्वाधन में आयोजित गोष्ठी में सामने आये।
रविवार सुबह ब्लड बैंक परिसर में आयोजित गोष्ठी का विषय था ’रक्तदान की उपयोगिता में मीडिया का योगदान‘। इस विषय पर पत्रकारों तथा चिकित्सा एवं स्वास्थय विभाग से जुडे लोगों ने अपने विचार प्रकट किये।
इस मौके पर डॉ. रोशन लाल गुप्ता, एपीआरओ रामकुमार पुरोहित, आरडब्ल्यूजेयू के जिलाध्यक्ष राजेश थाकण, पुरोहित ब्लड बैंक के चेयरमैन विष्णु पुरोहित, डॉ. प्रवीण शर्मा, नेहरु युवा केन्द्र के जिला समन्वयक अजय कुमार मिश्र, राजेन्द्र सोनी , डॉ. सविन्द्र सिंह, आरडब्ल्यूजेयू के जिलाउपाध्यक्ष राकेश मितवा, शहर अध्यक्ष कैलाश दिनोदिया, संरक्षक सुभाष नागपाल, विकेश सोनी आदि ने विचार व्यक्त किये।
सभी वक्ताओं ने स्वैच्छिक रक्तदान पर बल दिया तथा कही कि इसके लिये सामूहिक प्रयास होने चाहिए। इससे डिमांड पर ब्लड उपलब्ध होगा तथा रोगियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ होगा। उन्होनें कहा कि आज रक्त के क्षेत्र में नई तकनीक का इजाद हो गई और रक्त के अभाव में किसी की जान नही जा सकती। मीडियाकर्मी सकारात्मक सोच के साथ रक्तदान, इसकी उपयोगिता और अन्य पहलुओं पर ध्यान दे तो यह काम और भी आसानी से होगा तथा आमजन को लाभ मिलेगा।
वक्ताओं ने जानकारी दी कि हिन्दुस्तान में प्रतिवर्ष लगभग ९० लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता रहती हैं । जबकि फिलहाल ३५ लाख यूनिट रक्त ही प्रतिवर्ष दान स्वरुप प्राप्त होता हैं। कम्पोनेंट थैरेपी के प्रयोग होने से ३५ लाख यूनिट को ५३ लाख यूनिट रक्त के बराबर प्रयोग किया जा रहा हैं। कम्पोनेंट थैरेपी रक्त के बेहतर उपयोग हेतू विश्व की सर्वश्रेष्ठ तकनीक है। जिसके जरिए रक्त को विभाजित करके आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जा सकता है।
पुरोहित ब्लड बैंक के चैयरमेन विष्णु पुरोहित ने बताया कि ब्लड कम्पोनेंट थैरेपी की सुविधा पूरे बीकानेर संभाग क पुरोहित ब्लड बैंक में स्थापित की गई है। पुरोहित ब्लड बैंक की यह नवीनतम यूनिट हिन्दुस्तान के सर्वश्रेष्ठ उपकरणों से सुसज्जित है। इस नवीनतम यूनिट के जरिए रक्त को चार भागों मे विभाजित किया जा सकता है। पैक रेड सैल्स, फ्रोजन प्लाजमा, प्लेटलेटस व क्रायोप्रेसिपिटेटस
पैक रेड सैल्स का उपयोग रक्त की कमी, एनिमिया रोग एवं थैलेसिमिया में उपयोग किया जाता है। फ्रोजन प्लाजमा का उपयोग यह प्रोटीन की कमी, कोग्युलेशन फेक्टर की कमी में एवं जलने पर किया जाता है। प्लेटलेटस केवल रक्त स्त्राव व डैंगू में काम आते है। क्रायोप्रेसिपिटेटस हिमोफीलीया व फेक्टर टप्प्प् में काम आते है। इस प्रकार एक यूनिट रक्त विभिन्न रोगों के लिए काम आ सकता है। आमतौर पर हम रोगी सभी तत्वों से युक्त सम्पूर्ण रक्त रोगी को चढा देते है। क्योंकि इन तत्वों को अलग - अलग करने वाले उपकरण इस क्षेत्र में उपलब्ध नही थे। जिससें रोगी को अनावश्यक तत्व भी चढा दिये जाते है। जिससे रोगी के दिल एवं गुर्दो एवं अन्य महत्वपूर्ण अंगो पर बूरा प्रभाव पडता था । अब श्रीगंगानगर में ब्लड कम्पोंनेंटस की सुविधा पुरोहित ब्लड बैंक में उपलब्ध है। इसके जरिए अब रोगी को जिस तत्व की आवश्यकता है केवल वही उसको दिया जायेगा, जिससे रक्त की सही उपयोगिता सार्थक होगी वहीं रोगी भी अनावश्यक परेशानी पीडा एवं आन्तरिक नुकसान से बच सकेगाा। गोष्ठी में बताया गया कि पिछले वर्ष श्रीगंगानगर, हनुमानगढ. में डैंगू का भयंकर प्रकोप फैला था। डैंगू मे रोगी के शरीर में प्लेटलेटस तेजी से कम होते है। डैंगू मे रोगी को ठीक करने के लिये मात्र प्लेटलेटस ही देने पडते है। पर दुर्भाग्य से पिछले वर्ष श्रीगंगानगर में यह सुविधा नही होने से सभी रोगियों को जयपुर रैफर करना पडा एवं काफी रोगियों को जान से भी हाथ धोना पडा। पर अब श्रीगंगानगर में प्लेटलेटस की आपूर्ती की जा सकेगी।