नई दिल्ली, राजस्थान की मुख्य सचिव श्रीमती कुशल सिंह ने कहा है कि डीजल अनुदान योजना को पूरे राजस्थान में लागू किया जाना चाहिए। श्रीमती सिंह ने यह भी कहा कि इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला 50 प्रतिशत अनुदान का भार भी भारत सरकार द्वारा वहन किया जाना चाहिए।
श्रीमती सिंह शनिवार को नई दिल्ली के कृषि मंत्रालय द्वारा मानसून में हुई कम वर्षा के परिपेक्ष्य में कृषि एवं खाद्य सुरक्षा के विषय पर आयोजित राज्यों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में बोल रही थी। सम्मेलन की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की। सम्मेलन कों प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के व केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार ने संबोधित किया।
प्रदेश में मानसून में सामान्य से कम वर्षा के कारण उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों की ओर भारत सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए श्रीमती सिंह ने कहा कि वर्तमान में लागू की गई अनुदान योजना को प्रदेश में हुई 29 प्रतिशत से कम बारिश व लम्बे समय से बारिश नही होने के कारण पूरे प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला 50 प्रतिशत अनुदान का भार भी भारत सरकार द्वारा वहन किया जाना चाहिए।
श्रीमती सिंह ने राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय को प्रेषित 453.46 करोड की ग्रामीण पेयजल योजना को तत्काल स्वीकृत करने का आग्रह भी किया। प्रदेश में संभावित अकाल को ध्यान में रखते हुये राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत प्रदेश के 26 जिलों में राज्य सरकार द्वारा फसल मुआवजा के लिए दिए जाने वाले लगभग 425 करोड रूपये को भारत सरकार द्वारा वहन किये जाने का भी आग्रह किया।
मुख्य सचिव ने राज्य की इंदिरा गांधी परियोजना क्षेत्रा में बोए गए कपास की फसल को बचाने के लिए सिंचाई का पानी तत्काल उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उन्होनें उल्लेख किया कि पूरे देश में मानसून में हुई कम वर्षा को ध्यान में रखते हुए एन.सी.सी.एफ. के तहत राहत कार्यो के लिए राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए यह अधिकार आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में गठित ’’राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण‘‘ को दे दिया जाना चाहिए।
उन्हने बताया कि अभाव अवधि के दौरान गरीबी की रेखा के उपर जीवनयापन करने वाले लोगों की स्थिति गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले नागरिको के समान हो जाती है। ऐसी स्थिति में ए.पी.एल. के तहत वर्तमान के लगभग 64 हजार मैट्रिक टन के गेह के आवंटन को बढाकर 1.25 लाख मैट्रिक टन किया जाना चाहिए।
अपने प्रस्तुतीकरण के दौरान श्रीमती सिंह ने राज्य सरकार द्वारा खडी फसल को बचाने के संबंध में की जा रही कार्यवाही की जानकारी देते हुए राज्य सरकार द्वारा पहली बार खरीफ फसल 2009 की सिंचाई हेतु 1200 करोड की बिजली की खरीद का पुर्नभरण भारत सरकार द्वारा किए जाने की बात पर बल दिया। इसके अलावा उन्होंने रबी, 2009 में विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु राज्य में निर्माणाधीन केन्द्रीय विद्युत इकाईयों बरसिंगसर, आर.ए.पी.पी. (यूनिट 2,5 व 6) को शीघ्र पूर्ण कराए जाने की मांग रखी।
मुख्य सचिव महोदय ने प्रदेश में व्यापक स्तर पर संभावित अभाव के परिपेक्ष्य में यह सुझाव रखा कि सूखाग्रस्त क्षेत्रो में नरेगा के 100 दिवस के रोजगार को प्रभावित किए बगैर वर्तमान में सी.आर.एफ. मापदंडों के तहत रोजगार सृजित करने का प्रावधान किया जाना चाहिए अथवा विकल्प में सूखाग्रस्त क्षेत्रों में नरेगा के तहत अनुमत 100 कार्यदिवस को बढाकर 200 कार्यदिवस कर दिया जाना चाहिए।
श्रीमती सिंह ने खराब मानसून के मद्देनजर काश्तकारों को सस्ते दर पर सहकारिता बैंको द्वारा ऋण उपलब्ध कराने हेतु नाबार्ड द्वारा ऋण पुर्नभरण के ब्याज दर को कम किए जाने का सुझाव भी रखा।
सम्मेलन में प्रदेश की ओर से आपदा प्रबंधन सचिव तन्मय कुमार ने भी भाग लिया।