बीकानेर। पॉलिथीन का चलन ज्यों ज्यों बढता जा रहा है त्यों त्यों पशुओं के लिए नुकसादायक साबित हो रहा है, जबकि नगर निगम इस संबंध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पा रही है। जबकि नगर निगम की चलती कछुआ चाल गति के कारण शहर क्षेत्रों पुनः चकि्रत थैलियों का विनिर्माण, उपयोग, भंडारण एवं विक्रय बिना पाबंदी के धडल्ले से चल रहा है जबकि निगम प्रशासन के इसके उपयोग, विनिर्माण तथा विक्रय का रोकने का अधिकार होने के बाद भी शहर में इन नियमों को ताक में रखा जा रहा है। जबकि कि निगम प्रशासन मूक दर्शक बनकर देख रहा है और साथ ही इनके उपयोग पर कडी कार्यवाही के दावे ठोक रहा है परंतु वे खोखले साबित हो रहे हैं। जबकि शहर में 20 माइक्रोन से कम थैलियों के विनिर्माण, विक्रय की रोकथाम के लिए अप्रेल 2008 में एक दल गठित किया गया था लेकिन कुछ समय बाद यह दल भी बेसर साबित हो रहा है। जबकि वितीय वर्ष में निगम ने कुछ फर्मों के खिलाफ इस्तगासा दायर किये परंतु चालू वितीय वर्ष में इस दिशा में गठित दल ने कोई इस्तगासा नहीं पेश किया। इस प्रकार की कार्यवाही के चलते पॉलिथीन थैलियों का उपयोग बेतहाशा हो रहा है जो कि मानव स्वास्थ्य के साथ साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पडे बिना नहीं रह सकता। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में पुनःचकि्रत थैलियों के निर्माण, उपयोग के खिलाफ कोई उचित कार्यवाही नहीं होने के कारण पॉलिथीन थैली निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं। इनको रोकने के लिए विशेष दल गठित किया गया था लेकिन दल के सदस्यों के अन्यत्र लगा देने के कारण यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया है। हाल ही में निगम महापौर मकसूद अहमद व आयुक्त के.एम.दुडिया के नेतृत्व में सफाई निरीक्षकों की बैठक बुलाई गई जिसमें उनको पॉलिथीन निर्माण में विक्रय भंडारण विक्रय पर प्रतिमाह 15 चालान प्रत्येक सफाई इंस्पेक्टर को लक्ष्य आवंटित किया गया था परंतु निगम सूत्रों के मुताबिक यह लक्ष्य पाना नामुमकीन सा नजर आ रहा है।