बीकानेर, शहर में नकली मावे की बिक्री चरम पर है। दीपावली नजदीक आते ही शहर में मावे की खपत बढने लगी है। खपत बढने के साथ ही मिलावटी मावा भी बाजार में आना शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार बीकानेर शहर में प्रतिदिन दस से पन्द्रहा क्विटंल मावे की खपत हो रही है जो दिपावली के आस-पास पच्चिस से तीस क्विटंल तक पहुंच सकती है। लेकिन इस वर्ष पूरे प्रदेश में दूध की कमी है जिसके चलते मावे के उत्पादन में लगभग चालीस प्रतिशत गिरावट आ सकती है। मावा व्यापारीयों की आशंका है कि मावे के उत्पादन में आई कमी को पूरा करने के लिए शहर में बडे पैमानें पर नकली मावे की बिक्री होगी क्योकि शहर में मावा आस-पास के ग्रामीण इलाकों से आता है। इन क्षेत्रों मे नकली मावा बनानें का कारोबार बडे पैमानें पर होता है। मावे के विक्रेता अधिक कमाई के लालच में मिलावटी मावा बाजार में बेच रहे है क्योकि एक किलो दूध में केवल दो सौ ग्राम मावा ही निकलता है जिससे मावा व्यापारियों को पर्याप्त लाभ प्राप्त नहीं होता है। कई मावा व्यापारी स्टार्च आयोडिन, आलु आदि मिलाकर मावे के वजन को बढाया जाता है। नकली मावा बचने वालों में छोटे व्यापारी ही नहीं वरन बडे व्यापारी भी इसमें शामिल है जो अपनी बडी दूकानों के नाम पर नकली मावा बेच रहे है। मावा व्यापारी खुद तो ऐसा करते ही है लेकिन मिठाई व्यापारियों को भी वहीं मिलावटी मावा ऊंचे दामों पर सप्लाई किया जा रहा है इस कारण मिठाईयों के भाव भी बाजार में परवान पर है। लेकिन लालच में अन्धें मावा व्यापारीयों के पीछे नुकसान उपभोगता को उठाना पडता है। इनके ठिकाने स्थाई होने के बावजुद भी खाद्य विभाग कोई उचित कार्यवाही नहीं कर पाया है। कई मावे के जानकार बताते है कि मावे में से घी को निकालकर रिफाइन्ड ऑयल मिला देते है साथ ही शक्कर भी उचित मात्रा में मिलाई जाती है जिससें मावा खराब भी जल्दी नहीं होता और वजन भी बढ जाता है। गुरूवार को हमारें संवाददाता ने कई मावे व्यापारीयों से मिलकर मिलावटी मावे की जानकारी ली तो पता चला कि मिलावटी मावे की पहचाप केसे की जा सकती है तो कुछ व्यापारियों ने बताया कि दवा के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली टिंचर आयोडिन से असली व नकली मावे की पहचान करते है। उदाहरण के रूप में उन्होनें बताया कि थोडा मावा लेकर टिंचर आयोडिन की कुछ बदे डाल दी जाती है, अगर मावा नकली है तो मावे का रंग गहरा नीला हो जायेगा। मिलावटी मावे पकडे जाने के बाद अब लोग मावे से निर्मित मिठाईयों से दूर भागते नजर आ रहे है। इसके चलते दूकानदारों ने सोन पापडी व दूध से बनी मिठाई बेच रहे है। मिठाई विक्रेता का कहना है कि मावे कि मिठाईयों की बिक्री मे तीस प्रतिशत की कमी आई है। इस कारण मिठाई विक्रेता रसगुल्ला, छिना मलाई, बर्फी मलााई, टिकिया, मिल्क टॉस्ट आदि बना है।