जयपुर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की संवेदनशीलता हृदयरोगी शंकरलाल सोनी के लिये जीवनदान साबित होगी, ऐसा शायद उसने भी नहीं सोचा होगा। सुबह जन सुनवाई में सोनी की पीडा को सुनी।
सवाई मानसिंह अस्पताल के हृदय रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. राजीव बगहरट्टा को उसका ऑपरेशन करने की हिदायत के साथ सोनी को अस्पताल भेज दिया गया। इस बी.पी.एल.रोगी के उपचार के लिए हाथो हाथ २ लाख ७० हजार रूपये स्वीकृत करने के निर्देश भी जारी कर दिये। सोनी का ऑपरेशन हो चुका है और स्वस्थ होने के पश्चात उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पांच बच्चों के पिता शंकर लाल सोनी पिछले कई वर्षों से कष्टपूर्ण जीवन जी रहा था। हृदय की मांसपेशिया शिथिल होने से उसकी पम्पिंग क्षमता सिर्फ २५ प्रतिशत ही रह गई थी इसकी वजह से उसकी दैनिक दिनचर्या अत्यधिक श्वांस भरने से प्रभावित हो रही थी। बार-बार अस्पताल में भर्ती होने पर बमुश्किल उसकी जान बचाई जा रही थी। सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉ. राजीव बगहरट्टा ने उसे नवीनतम विधि (सी.आर.टी.) द्वारा उपचार कराने का प्रस्ताव दिया था। इस विधि के तहत पेसमेकर द्वारा हृदयदय को सम्बल दिया जाता है और रोगी की स्थिति बेहतर बन जाती है। बहुत ज्यादा गरीबी के कारण सोनी न तो राज्य के बाहर ईलाज कराने की स्थिति में था और न ही इस विशेष प्रकार के उपचार की यह सुविधा हर जगह उपलब्ध थी। गंगानगर निवासी सोनी ने निराशा के हालात में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से ईलाज की गुहार की। गहलोत ने रोगी की पारिवारिक स्थिति और उसकी गम्भीर स्थिति को भांपते हुए संवेदनशीलता का परिचय दिया और तुरन्त उपचार के लिए २ लाख ७० हजार रूपये स्वीकृत करते हुए उपचार के लिए निर्देष जारी किये। डॉ. राजीव बगहरट्टा ने अपोलो अस्पताल दिल्ली के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बलबीर सिंह के साथ मिलकर उसका ऑपरेशन किया। इसमें प्रो. अनूप जैन तथा प्रो. शशिमोहन शर्मा ने भी सहयोग प्रदान किया।
शंकर लाल सोनी के उपचार के बाद इस जीवन रक्षक तकनीक के सवाई मानसिंह अस्पताल में उपलब्ध होने से अब गरीब एवं गम्भीर रोगियों के ईलाज का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। इस तकनीक में हृदय के विभिन्न चेम्बर को सामन्जस्य बैठाकर हृदय की कार्य क्षमता को बढाया जाता है। जिससे रोगी की कार्य शैली में अभूतपूर्व सुधार हो सकता है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री एमादुद्दीन (दुर्रू मियां) ने भी इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए चिकित्सकों को बधाई दी है।