बीकानेर- हाड कंपा देने वाली सर्दी ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक से लगा दिए हैं। कोहरे और सर्द हवाओं के बीच सुबह दस बजे तक भी शहर की अधिकांश सडकें सूनी सी रहीं। ठंडी हवाओं और गिरते पारे ने सर्दी के असर को और तीखा कर दिया है। रातभर गिरी ओस के बाद आज सुबह अल सवेरे ही शहर पर कोहरे की हल्की चादर छाने लगी थी जो दिन चढने के साथ ही गहराती गई। जबरदस्त सर्दी के चलते आम दिनों की तुलना लोगों की दिनचर्या देर से ही शुरु हुई। सडकों पर सुबह नाम मात्र की ही आवाजाही देखी गई और जगह-जगह लोग अलाव जलाए नजर आए। सरकारी कार्यालयों में अवकाश होने के कारण कर्मचारियों को राहत मिली लेकिन स्कूली बच्चे सर्दी से जूझते रहे। सर्दी के चलते रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड भी सूने ही नजर आए। सिहराती ठंड हो या ओस बरसाता कोहरा, धुंध में कुछ नजर नहीं आता, पर उन्हें तो समय पर स्कूल जाना ही है। कंफपाते हुए तैयार होना है। इन मासूम विद्यार्थियों पर फिलहाल किसी का ध्यान नहीं है। इन्हें तैयार करते माएं बेशक इनकी आंखों में पढ लेती हैं कि मां देखो न कितना कोहरा है, आज स्कूल मत भेजो...पर वे व्यवस्था के चलते लाचार नजर आती हैं। जिले में पड रही कडाके की ठंड व कोहरे से जहां एक ओर जनजीवन थम सा गया है वहीं, जिले का शिक्षा विभाग सर्दी से नन्हे-मुन्नों के स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रतिकूल प्रभाव की ेफिऋ से बेफिऋ नजर आ रहा है। विभाग की ओर से बच्चों को सर्दी के प्रकोप से बचाने के लिए विद्यालयों में न तो पुख्ता प्रबंध किए गए और न ही अवकाश ही घोषित किया गया है। विभाग के बडे अफसर डीईओ की तरफ से प्रस्ताव का मुंह ताक रहे हैं और जिला प्रशासन विभाग के अफसरों का। जिले के कई सरकारी विद्यालयों में बच्चों को जमीन अथवा टाटपट्टी पर बैठाकर विद्यार्जन कराया जाता है। अधिकांश सरकारी विद्यालयों में फर्नीचर का अभाव है। इसके अलावा विद्यालयों में नन्हे-मुन्नों को ठंड से बचाने के भी पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।