जयपुर, ९ मार्च। तीन दिन से कोहरे के कारण उत्तरप्रदेश और हरियाणा में प्रसारण लाइनों के ठप होने से राजस्थान में बिजली की कमी रविवार को भी जारी रही। प्रसारण लाइनों के ठप होने से जहां बडे केन्द्रीय बिजली घरों रिहंद और सिंगरौली म उत्पादन काफी कम हो गया है, वहीं उत्तरी ग्रिड की ‘फ्रिक्वेन्सी’ लगातार कम होने से प्रदेश को अन्य राज्यों से करार के तहत बिजली नहीं मिल पा रही है।
खेती के लिए बिजली की मांग बराबर रहने और गर्मी बढ जाने से मांग में बढोतरी के कारण करीब १५० लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली की कमी का सामना प्रदेश को करना पड रहा है। राजस्थान के पास अपनी ९७० यूनिट बिजली है और मांग करीब ११२० लाख यूनिट प्रतिदिन की चल रही है।
अधिकृत सूत्रों के अनुसार शनिवार को तो उत्तरी ग्रिड में बिजली की आवृत्ति २४ में से १९ घंटे ४९ हर्ट्ज से कम रही जिससे केन्द्रीय बिजलीघरों में उत्पादन तो कम करना ही पडा, वहीं प्रदेश को अनुबंध के तहत अन्य राज्यों से मिलने वाली बिजली की आपूर्ति बहुत कम हो पाई। कोहरे के कारण ४०० केवी की प्रसारण लाइनों के ठप हो जाने से सिंगरौली और रिहंद बिजलीघरों में उत्पादन १५ सौ मेगावाट घटाना पडा।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश में भी शनिवार-रविवार की रात अलवर और भरतपुर जिले के कुछ हिस्सों में घना कोहरा पडने से प्रसारण लाइनों पर असर पडा। इससे प्रदेश के सर्वाधिक खपत वाले भिवाडी औद्योगिक क्षेत्र में रात १२ बजे से ही सप्लाई बंद हो गई जिसे सवेरे करीब दस बजे आंशिक तौर पर सामान्य किया जा सका। मार्च के महीने में कोहरा पडना जहां असामान्य है वहीं प्रदेश में अभी तक किसानों को गेहूं की फसल के लिए पानी की आवश्यकता के कारण मांग में कमी नहीं आई है। इसके साथ ही अधिकांश भागों में गर्मी प्रारंभ हो जाने से घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली की मांग अचानक बढ गई है। उत्तरी ग्रिड में चल रहे संकट के कारण प्रदेश को ग्रिड से आम तौर पर अधिक मिलने वाली बिजली भी नहीं मिल पा रही है।
सूत्रों के अनुसार दो दिन कोटा ताप बिजलीघर की पांचवीं इकाई के बंद होने से भी प्रतिदिन ४६ लाख यूनिट की कमी चल रही थी। इस इकाई के रविवार की रात तक फिर प्रारंभ होने के बाद बिजली की उपलब्धि में कुछ सुधार होने की संभावना है।