बीकानेर। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का दो दिवसीय सम्मेलन ओसवाल पंचायती सभा भवन गंगाशहर में समापन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के 20 जिलों से लगभग 200 प्रतिनिधियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में पांच सत्रों में विचार विमर्श किया। जिसमें अपराध प्रक्रिया संहिता में संशोधन, ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008, साईबर क्राईम एवं मध्यस्थता संबंधी विधियों का विश्लेषण किया गया। कार्यक्रम में विधि विश्वविद्यालय के व्याख्याता ए.पी.सिंह उपस्थित थे। समापन अवसर पर परिषद के सह संगठन मंत्री कमलेश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अनिल राजवंशी ने कार्यकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। दो दिवसीय अधिवेशन में कृषि भूमि संरक्षण के संबंध में प्रस्ताव पारित करने, सीमा क्षेत्र में विक्रित भूमि के सभी अभिलेख निरस्त करने, कृषि भूमि को संपरिवर्तित करने, प्रभावी कानून बनाकर कठोरता से लागू करने पर विस्तृत चर्चा की गई। इस संबंध में परिषद के अध्यक्ष अनिल राजवंशी ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बताया कि सीमा क्षेत्र में भूमि विक्रय के संबंध में प्रभावी कानून बनाने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करें व उसकी सिफारिशों पर शीघ्र कानून बनाएं। राज्य सरकार सभी कानूनों पर पुनर्विचार करे एवं धारा 90 बी पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने व ऐसी आवंटित भूमि जिनका उपयोग आवंटन परियोजनार्थ न होने पर पुनः कृषि कार्य के लिए लौटाने आदि पर चर्चा की। परिषद के प्रदेश महामंत्री बसंत छाबा ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार जहां तक संभव हो सके कृषि योग्य भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए आवंटित न करे, यदि औद्योगिक प्रयोजनार्थ के लिए आवंटित की गई हो तो वहां उद्योगों की स्थापना न होने पर पुनः उन्हीं काश्तकारों को लौटा दी जाए, शहरी सीमा का विस्तार करते समय ऐसे गांवों व शहरी क्षेत्रों को अलग रखा जाए जहां कृषि उपयोग का क्षेत्र हो। भूमि विक्रय का पंजीयन होते ही राजस्व अभिलेख में तुरंत अमल दरामद हेतु राजस्व अधिकारियों को पाबंद किया जाए। परिषद के दो दिवसीय अधिवेशन में कई प्रस्ताव रखे गए पश्चिमी सीमा क्षेत्र विक्रय घोटाले की जाएं एवं विक्रय पर पाबंदी लगाने, कृषि भूमि संबंधी कानून नीति बनाने आदि मुख्य थी।