लगता है देश के दर्शकों को 'रिएलिटी शो' की रिएलिटी' बहुत जल्दी समझ में आ गई है, लेकिन टीवी चैनल वालों को अभी तक समझ में नहीं आई है। भावनाएं भड़का कर दर्शकों से एसएमएस के नाम से प्रति एसमएमएस 6 से 8 रुपये तक की कमाई करने वाले टीवी चैनलों के लिए यह बुरी खबर है कि रियलिटी शो का 'वक्त अब जा चुका है'। ताजा रिपोर्ट के अनुसार इनमें भेजे जाने वाले एसएमएस की संख्या और दर्शक दोनों तेजी से घट रहे हैं। विशेषज्ञों ने भी साफ कर दिया है कि अब टीवी चैनलों पर रियलिटी शो थोड़े दिन के मेहमान हैं।
कई विज्ञापन कंपनियों ने भी टीवी चैनलों को आगाह कर दिया है कि अब रिएलिटी शो के नाम से विज्ञापन मिलना आसान नहीं रहा। देश भर के टीवी चैनलों ने मेलों में लगने वाली खिलौनो और चाट-पकौड़ी की दुकानों की तर्ज पर अपने अपने रिएलिटी शो पेश करने शुरु कर दिए थे। किसी हिन्दी फिल्म की कहानी की तरह इन कार्यक्रमों के सेट पर प्रायोजित नाटकीयता, पक्षपात, गाली-गलौच, आरोप-प्रत्यारोप सब कुछ होता है और दावा इस बात का किया जाता है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से देश को एक प्रतिभा देने जा रहे हैं। अब ये वाकई शोध और खोज का विषय है कि इतने सालों में टीवी के जरिए देश के सामने जो प्रतिभाएं आई वो ऑर्केस्ट्रा के मंच के अलावा कहीं और कोई दिखाई क्यों नहीं देती।
भारत में टीवी कार्यक्रमों का बाजार 19,500 करोड़ का है,जिसके 2010 तक 36,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें रियलिटी शो का हिस्सा अभी भी 30 प्रतिशत ही है। शेष 70 प्रतिशत की हिस्सेदारी अभी भी टीवी धारावाहिकों की ही है।