मार्गदर्शक मण्डल ने की मन्दिर सम्पदा की वीडियोग्राफी और दस्तावेजीकरण की मांग
बांसवाडा, १० जनवरी/बांसवाडा शहर में अवस्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्त्व के मन्दिर समूह राजराजेश्वर को खुर्द-बुर्द करने की असामाजिक तत्वों द्वारा की जा रही कोशिश पर श्रद्धालुओं में तीव्र रोष एवं आक्रोश लगातार बढता जा रहा है।
विडम्बना यह है कि जिनके जिम्मे इन मन्दिरों की सुरक्षा और देखभाल के साथ रोजाना देव प्रतिमाओं को भोग लगाने का दायित्व है वे पूरी तरह बेखबर हैं।
पिछले एक पखवाडे से श्री राजराजेश्वर मन्दिर एवं सम्बद्ध मन्दिर समूह में पूजा-अर्चना और देच दर्शन के लिए प्रतिदिन सैकडों श्रद्धालु उमड रहे हैं, ऐसे में असामाजिक तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर शान्तिपूर्वक की जा रही पूजा-अर्चना और आपसी सौहार्द को नष्ट करने के लिए मन्दिरों और पुरातात्विक सम्पदा को खुर्द-बुर्द करना शुरू कर दिया है।
इस परिसर में स्थित मन्दिरों के शिखर पिछले चार-पांच दिनों में तोड दिए गए हैं और कतिपय पुरातात्विक महत्व की सामग्री भी गायब की जा रही है। इनमें आकर्षक कलाकृतियों से पूर्ण मन्दिर के नन्दी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही कतिपय प्राचीन शिलालेखों के साथ भी छेडछाड की जा रही और उन पर अंकित पुरा लिपि को भी मिटा दिया गया है।
इस संबंध में श्री राजराजेश्वर संघर्ष एवं विकास समिति तथा समिति के अनुषांगिक संगठन मार्गदर्शक मण्डल ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया है जिसमें असामाजिक तत्वों द्वारा देवस्थान विभाग और राजस्थान सरकार की इस सम्पत्ति को बडी क्षति पहुंचाने की आशंका से अगवत कराया है और मन्दिर समूह की पूरी वीडियोग्राफी तथा दस्तावेजीकरण की त्वरित कार्यवाही की मांग की है।
समिति के संयोजक कमल शर्मा, मार्गदर्शक मण्डल के अध्यक्ष पं. लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, महामंत्री पं. भूपेन्द्र उपाध्याय ’तनिक‘, अतिरिक्त महामंत्री पं. सत्यनारायण व्यास, उपाध्यक्ष पं. धनपतराय झा, कोषाध्यक्ष योगेश व्यास, एड्वोकेट भालचन्द्र नागर, एड्वोकेट मनोहर पटेल आदि का प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेज चुका है और जिला प्रशासन से अरबों रुपए की राजकीय पुरातात्विक सम्पदा को असामाजिक तत्वों की भेंट चढने से रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम तथा ऐसे तत्वों की धरपकड कर कानून सम्मत कार्यवाही की मांग कर चुका है।