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| 02 December 2008 |
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बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने सहित, सामाजिक कुरीतियों के विरूद्ध सामूहिक संकल्प लिया बांसवाडा, १० जुलाई। केन्द्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक आर.एस. माथुर ने कहा है कि बिना संगठित हुए महिलाएं समाज में कोई सकारात्मक काम नहीं कर सकती। महिलाएं सगठित होकर समाज में असंभव काम भी संभव कर दिखा सकती है। बशर्तें उसके लिए शैक्षिक जनचेतना व सकारात्मक सोच हो। केन्द्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड के निदेशक आर.एस. माथुर मंगलवार को यहां अगरपुरा स्थित विशेष बाल श्रमिक विद्यालय में पढने वाले श्रमिक बच्चों की श्रमिक माताओं के लिए लेकसिटी मूवमेंट सोसायटी व केन्द्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित दो दिवसीय श्रम कल्याण एवं विकास संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सभी प्रतिभागी महिलाओं ने अपने बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने, बाल विवाह न करने जैसी सामाजिक कुरूतियों से मुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाए जाने के लिए विशेष समूह में रहकर प्रयास करने पर बल दिया। देश विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित करने वाली ख्यातनाम महिलाओं को प्रेरणा स्रोत बताते हुए महिलाओं से प्रतिदिन एक घंटा शिक्षण कार्य व एक घंटा समाज में सकारात्मक वातावरण देने की बात कही। ताकि वह अपने व अपने परिवार के शिक्षण कार्य व स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान दे सके। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न उदाहरण भी देकर महिलाओं को छोटे-छोटे कार्यों से महान बनने के टीप्स दिए। समारोह में महिला सुरक्षा व सलाहकार समिति की समन्वयक बिन्दिया ने महिला कानूनों, घरेलू हिंसा, आर्थिक व सामाजिक अपराध तथा सरकार द्वारा चलाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया। बिन्दिया ने महिलाओं को किसी भी तरह का शोषण होने पर किस तरह थाना पुलिस में शिकायत की जाती है उसके बारे में विस्तार से बताया। समारोह में श्रम कल्याण अधिकारी अस्मत खान ने असंठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को न्यूनतम मजदूरी, समान वेतन तथा कारखानों में श्रमिक महिलाओं को दिए जाने वाली सुख-सुविधाओं व परिलाभों के बारे में बताया। उन्होंने महिलाओं को अपने बच्चों को नियमित बाल श्रमिक विद्यालयों में भेजने व एक अच्छा नागरिक बनाए जाने के लिए शिक्षण कार्य से जोडने पर बल दिया। पाठ्यक्रम समन्वयक शिक्षाधिकारी एस.आर. गोछायत ने दो दिवसीय संगोष्ठी में पढाए गए पाठ्यक्रमों के बारे में बताया। इस संगोष्ठी में महिलाओं को शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, न्यूनतम मजदूरी व सामाजिक अपराध निवारण के साथ सामाजिक कुरूतियों के बारे में बताया। संगोष्ठी में सामाजिक कार्यकर्ता दीपक श्रीमाल ने महिलाओं को मिलने वाले विभिन्न अधिकारी, जनसुविधाओं के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सरकार ने महिलाओं के कई कल्याणकारी योजनाएं चला रखी है लेकिन जागरूकता के अभाव में वे उनका लाभ नहीं ले पा रही है। उन्होंने जिला उद्योग केन्द्र, नगरपालिका, खादी ग्रामोद्योग, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। लेकसिटी मूवमेंट सोसायटी के सचिव हरिश पालीवाल ने बताया कि केन्द्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड ने पहली बार बांसवाडा में किसी स्वयं सेवी संस्था के साथ इस संगोष्ठी का आयोजन किया है। इसका उद्देश्य श्रमिक महिलाओं में उनके बच्चे व उनके परिवारों को विभिन्न विषयों पर जागरूकता प्रदान करना था। समारोह में क्षेत्रीय पार्षद श्यामाराणा भी उपस्थित थी। समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को बोउर् की ओर से मानदेय प्रदान किया गया। इस अवसर पर सोसायटी की अनुदेशक श्रीमती सुधा नागदा व सुश्री रीना शर्मा भी उपस्थित थे।
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