लिग्नाइट के 70 प्रतिशत ब्लॉक्स बिजली उत्पादन के लिए-जाट
10 Aug
2009
नई दिल्ली में राज्यों के खनिज मंत्रियों का सम्मेलन
जयपुर। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रामलाल जाट ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि राजस्थान में बिजली की कमी और प्रदेश में लिग्नाइट के अथाह भंडारों को देखते हुए 70 प्रतिशत लिग्नाइट ब्लॉक्स को बिजली उत्पादन के लिए आरक्षित रखा जाना चाहिए। जाट सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन एनेक्सी में केन्द्रीय कोयला राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की अध्यक्षता में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम संशोधन बिल-2008 पर चर्चा के लिए आयोजित राज्यों के खान एवं खनिज मंत्रियों के सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की विशेष भौगोलिक परिस्थितियाँ हैं तथा प्रदेश प्रायः सूखे और अकाल की चपेट में रहता है। कृषि प्रधान प्रदेश की खेती-बाडी मानसून पर निर्भर है। ऐसी परिस्थितियों में प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा रोजगार का प्रमुख जरिया बन गयी है। प्रदेश की अरावली पर्वत श्रृखंलाओं और पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तान प्रधान क्षेत्रों में भारी मात्रा में खनिज सम्पदा उपलब्ध है। जाट ने बताया कि राजस्थान सरकार लिग्नाइट आधारित पावर प्लांट्स लगाकर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनाने के प्रयासों में जुटी हुई है। निजी क्षेत्र में भी थर्मल पावर प्लांट आ रहे हैं, जिससे प्रदेश में बिजली की पूर्ति संभव हो सकेगी। पर्यावरण राज्यमंत्री ने बैठक के एजेंडा बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि राजस्थान सरकार खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधित बिल का स्वागत करती है और इसके प्रारूप से सैद्घांतिक रूप से सहमत है। उन्होंने सुझाव दिया कि खानों की बोली से प्राप्त होने वाली राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा बतौर प्रथम वार्षिक किस्त के रूप में राज्यों को मिलना चाहिए। शेष राशि पांच समान वार्षिक किश्तों में दी जाए। जाट ने बताया कि राजस्थान में यह प्रावधान मौजूद है कि खनिज क्षेत्रों को अन्य प्रयोजनार्थ आवंटित करने में पूर्व खान एवं खनिज विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एन.ओ.सी.) लेना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के लिग्नाइट प्रधान कुछ क्षेत्रों में पेट्रोलियम और गैस के भंडार भी मौजूद हैं। ऐसी परिस्थिति में यह संभव नहीं हो सकता कि किसी क्षेत्र विशेष को खनिज विशेष के लिए आरक्षित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि केन्द्र को खनिज-ब्लॉक्स एक ही कम्पनी विशेष को आवंटित करने की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि खनिज ब्लॉक्स आवंटन के कारण विस्थापित होने वाले लोगों को बाजार दर से पर्याप्त मुआवजा राशि मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने खनिज परियोजना से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के विशेष प्रबन्ध सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जाट ने बताया कि कोयला एवं लिग्नाइट अधिसूचित क्षेत्रों के बोलीदाताओं से परियोजना क्षेत्रों में पर्यावरणीय विकास सम्बंधी कार्यों की गारंटी भी ली जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के मार्गदर्शन में प्रदेश व्यापी ‘‘हरित राजस्थान’’ अभियान चलाया जा रहा है। विशेष कर खनिज परियोजना क्षेत्रों को हरा भरा रखने के लिए उद्यमियों को पाबंद किया जा रहा है। साथ ही सामुदायिक कल्याण और सीमांत क्षेत्र विकास के लिए प्रतिबद्घता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। उन्होंने पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राजस्थान में वन्य जीव अभयारण्यों के भ्रमण के लिए सभी राज्यों के सम्बन्धित मंत्री एवं अधिकारियों को आमंत्रित किया। बैठक में राज्य के प्रमुख खनिज सचिव गोविंद शर्मा ने भी भाग लिया।
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