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| 29 August 2008 |
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बीकानेर १० सितम्बर। शिक्षको की विभिन्न मांगों को लेकर आज विभिन्न शैक्षिक संगठनों के दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन शुरू हुए, जिनमें शिक्षको की लम्बित मांगों पर चर्चा के साथ-साथ अनेक प्रस्ताव पारित किए गए। सादुल स्कूल में शुरू हुए राजस्थान शिक्षक संध राष्ट्रीय के सम्मलेन का उद्धाटन बीकानेर विवि के कुलपति सी.बी.गैना व भाजपा प्रदेश कार्यसामिति सदस्य सत्यप्रकाश आचार्य ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर गैना ने कहा कि शिक्षक आज समाज का आधार स्तम्भ है । वह शिक्षक कार्य के अलावा अन्य गतिविधियों में भी अग्रणी है। उनके साथ किसी प्रकार का अमानवीय व्यवासियक उचित नहंी हैं। कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य ने कहा कि शिक्षक का कार्य शिक्षण के अलावा और कोई नहंी होना चाहिए। सरकारों द्वारा शिक्षक को खाना बनाना या अन्य प्रकार की गणनाओं में लगाना उसके पद के अनुकूल हैं उन्होनें केन्द्र व राज्य सरकार से शिक्षकों को शिक्षक कार्य में लगाने की मांग की। कार्यक्रम में शिक्षकों के स्थानांतरण नीति, समर्पित अवकाश, प्रथम नियुक्ति से चयनित वेतनमान, वेतन, विसंगतियों को दूर करने सहित अनेक मुद्दों पर चर्चाए की गयी। संध का प्रतिवेदन नगर मंत्री रवि आचार्य ने प्रस्तुत किया। सम्मेलन में मदनलाल मूण्ड, सुरेश व्यास, बी.डी. कल्ला, कन्हैयालाल छींपा, श्रीबल्लभ पुरोहित, चन्द्रशेखर हर्ष ने विचार रखे। यही राजस्थान अम्बेडकर शिक्षक संध के सम्मेलन का उद्धाटन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम.एल.खीची ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी तेजसिहं धारीवाल ने की। सम्मेलन में एससीएसटी वर्गों का रोस्टर रजिस्टर सही करने, जोन अॅाफ कन्सीड्रेशन की सीमा समाप्त करने, कच्ची बस्तियों में विद्यालय खोलने, ७५ प्रतिशत शिक्षकों को प्राथमिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा में लगाने की मंाग की गयी। पाबू पाठशाला विद्यालय में राजस्थान शिक्षक संध प्रगतिशील के दो दिवसीय शिक्षक सम्मेलन का उद्धाटन करणीसिंह राठौड ने द्वीप प्रज्वजलित कर किया। राठौड ने अपने उदृबोधन में शिक्षकों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार व सरकार की शैक्षिणक नीतियों पर रोष जताया। उन्होनें कहा कि शिक्षक को पशुगणना, पोषाहार जैसे कार्यक्रमों में लगाने से न सिर्फ शैक्षिणक व्यवस्था चौपट होती हे अतितु शिक्षकों का स्तर भी गिरता हैं उसके बाद राज्य सरकार द्वारा कम परीक्षा के आधार पर स्थानांतरण की नीति अपनाकार दोहरी मार मारी जाती है । सम्नमेलन में सुभाष आचार्य, गुरचरणसिहं मान, अशोक आचार्य, इलियास जोइया ने भी संबोधित किया।
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