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| RSS | 22 November 2009 |
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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गुरूवार को विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के शिक्षकों को संशोधित वेतनमान देने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। गहलोत ने परिवर्तित बजट पेश करते समय चड्डा समिति की सिफारिशों के अनुसार विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों को संशोधित वेतनमान देने के लिए प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दो माह में रिपोर्ट देने को कहा था। गहलोत को समिति के अध्यक्ष एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव एल.पी.कोठारी ने यह रिपोर्ट सौंपी। इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. सिंह, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. श्रीनिवासन, मुख्यमंत्री के प्रमुख शासन सचिव श्रीमत पाण्डेय, समिति के सदस्य, प्रमुख शासन सचिव उच्च शिक्षा तपेश पंवार, कार्मिक विभाग के सचिव खेमचन्द, उपसचिव वित्त (आर.) आदित्य पारीक तथा समिति के पदेन सचिव एवं उच्च शिक्षा के उपसचिव आर.सी. गुप्ता भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि समिति ने कई बैठकों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आई.सी.ए.आर.) से प्राप्त दिशा निर्देशों पर विचार-विमर्श करने के साथ ही वर्तमान में दिये जा रहे वेतनमानों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी है। समिति ने अनुशंसा की है कि विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर, सह आचार्य एवं आचार्य के पद के लिए यू.जी.सी. द्वारा सुझाए गए संशोधित वेतनमान स्वीकार किये जायें। इसी प्रकार विश्वविद्यालय में कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्ष, शारीरिक प्रशिक्षक केडर को भी संशोधित वेतनमान का पदनाम के साथ लाभ दिया जाए। महाविद्यालय शिक्षकों के लिए समिति ने अनुशंषा की है कि वर्तमान में कार्यरत व्याख्याताओं को सहायक प्रोफेसर एवं सह आचार्य का वेतनमान पदनाम सहित दिया जाए। महाविद्यालय के प्राचार्य को 10000/-रुपये एकेडमिक ग्रेड पे के साथ आचार्य (प्रोफेसर) का वेतनमान दिया जाए। उपाचार्य के लिए 9500/-रुपये की ग्रेड पे निश्चित की गई है। छठे वेतन आयोग द्वारा निर्धारित तीसरे व चौथे पे-बैण्ड में सभी शिक्षकों का वेतनमान राज्य सरकार के फॉर्मूले के अनुसार निर्धारित किया जाए। सिफारिश में कहा गया है संशोधित वेतनमान 1 जनवरी, 2006 से लागू किया जाकर 40 प्रतिशत एरियर का भुगतान इसी वर्ष में किया जाए एवं शेष 60 प्रतिशत एरियर का भुगतान यू.जी.सी. द्वारा रेगूलेशन अधिसूचित करने के पश्चात् विश्वविद्यालयों द्वारा अपने स्टेट्यूट में तद्नानुसार संशोधन किए जाने पर ही किया जाए। मंहगाई भत्ते के अलावा अन्य सभी तरह के भत्ते, पेंशन, ग्रेच्यूटी इत्यादि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्ड के अनुसार देय होंगे। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों को संशोधित वेतनमान दिए जाने पर 1 जनवरी, 2006 से 31 मार्च, 2010 तक की अवधि के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार का 80 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा तथा 20 प्रतिशत राज्य सरकार तथा संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा वहन किया जाएगा। एरियर के भुगतान पर राज्य सरकार पर 130 करोड रुपये का तथा यू.जी.सी. पर 520 करोड रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पडेगा जबकि 1 अप्रेल, 2010 के बाद प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालयों को वहन करना पडेगा।
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