बीकानेर। शहर में आवारा पशुओं के बढते प्रकोप ने आमजन का आना जाना दुश्वार कर दिया है। हाल ये है कि प्रतिदिन कोई न कोई व्यक्ति इनका शिकार हो ही जाता है। इनका डर लोगों में इस कदर हावी है कि अब कई लोग ऐसे इलाकों जहां पर आवारा पशुओं की तादाद अधिक है वहां से निकलने से परहेज करने लगे हैं। उनका कहना है कि ऐसे में चोटिल होने का खतरा बना रहता है और अनेक बार आवारा पशुओं की मार से अकाल मौते भी हुई है, जिससे भय लगता है। कुछ ऐसे हालात शहर में फड बाजार, मेडिकल कॉलेज, कोटगेट सब्जी मंडी, मुक्ता प्रसाद कॉलोनी सहित अनेक रिहायशी इलाकों के हैं।
वर्षों पुरानी है ये समस्या
फडबाजार व कोटगेट सब्जी मंडी में आवारा पशुओं की समस्या कोई नई बात नहीं है। यहां के सब्जी विऋेता कहते हैं कि ये आवारा जानवर यहां दिनभर विचरण करते रहते हैं। ये दुकानों पर मुंह मारने के साथ ही ग्राहकों द्वारा थैले में ले जा रही सब्जी को छीनकर सामने वाले को बुरी तरह घायल कर देते हैं। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत कई बार नगर निगम कार्यालय में की जा चुकी है, पर अभी तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
टैक्स देने पर भी कोई सुविधा नहीं
सब्जी विऋेताओं का कहना है कि नगर निगम द्वारा यहां से टैक्स के रूप में पैसा तो नियमित रूप से वसूल किया जाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता। यहां सुलभ शौचालय नहीं होने की वजह से यहां गंदगी का आलम बना रहता है। साथ ही सफाई व्यवस्था भी पूर्णतः चरमराई हुई है। इसकी कई बार शिकायत की गई, मगर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
निविदा निकाली गई
आवारा पशुओं को पकडने के लिए निगम प्रशासन द्वारा निविदा भी निकाली जा चुकी है लेकिन ठेकेदार निविदा लेने को तैयार नहीं है। ठेकेदारों का तर्क है कि पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण वह राशि में किसी प्रकार की बढोतरी नहीं होने के कारण भी लाभ की स्थिति नहीं है। ऐसे में निविदा आदेश न देकर प्रशासन को अपने स्तर पर ही कार्यवाही करनी पडेगी।
क्या कहते हैं लोग
यहां आवारा जानवरों के कारण रोज कोई न कोई व्यक्ति घायल होता ही रहता है। नगर निगम को चाहिए कि वो इस दिशा में कठोर कार्रवाई कर लोगों को जानवरों के भय से मुक्त करे। - श्रीमती शबनम बानो
यहां से खरीदारी करते समय सौ बार सोचना पडता है, क्योंकि पता नहीं कब कौन कहां इन आवारा जानवरों का शिकार होकर अस्पताल पहुंच जाए, इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है। - घनश्याम नारायण
नगर निगम को चाहिए कि वो शहर की सभी मंडियों को आवारा जानवरों से मुक्त करें। नहीं तो ये जानवर किसी न किसी को अपना शिकार बनाते रहेंगे। - भानू व्यास, नेता प्रतिपक्ष
यहां घूम रहे आवारा जानवरों में वो गाएं भी शामिल हैं, जिन्हें उनके मालिक दूध निकालने के बाद खुल्ला छोड देते हैं। उन्हें सोचना चाहिए कि इससे कितने लोगों को असुविधा होती है। आमजन को भी आवारा पशुओं को पकडवाने में निगम प्रशासन की मदद करनी चाहिये क्योंकि अनेक बार पशु क्रुरता कानून के तहत निगम को परेशानियों का सामना करना पडता है। - मकसूद अहमद, महापौर, नगर निगम