ब्रिगेडियर सुलतानसिंह का गौरवशाली सैन्य कार्यकाल रहा
10 Oct
2007
ब्रिगेडियर सुलतानसिंह का जन्म १० जनवरी-१९१२ को चूरू जिले की सुजानगढ तहसील के गांव आसरासर में हुआ। बीकानेर में शिक्षा प्राप्त कर १९३३ में फौज में अपना कार्यकाल प्रारम्भ करने वाले सुलतानसिंह १९६५ तक भारतीय सेना में सेवारत रहे।

श्रीगंगानगर, १० अक्टूबर/ प्रवक्ता एस.एस. कटोच ने बताया कि बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह के अधिनस्थ अपना सैन्य जीवन प्रारम्भ करने के पश्चात आपने देहरादून स्थित विश्व प्रसिद्व भरतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शरुरूआती सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालो में भारतीय सेना के प्रमुख रहे जनरल रैणा भी उनके साथ शामिल थे। अपने गौरवशील सैन्य कार्यकाल के दौरान उन्होने बर्मा में द्वितीय विश्व युद्व के दौरान जापानियो के खिलाफ लडाई में हिस्सा लिया और ख्याती प्राप्त की। १९४७-४८ में कश्मीर में पाकिस्तान के विरूद्व जंग में निर्णायक भूमिका निभाई। इस जंग के पश्चात उन्होने भारतीय सेना, पाकिस्तानी सेना तथा संयुक्त रास्ट्रके अधिकारियो के साथ लाईन ऑफ कंट्रोल (एल.ओ.सी.) के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुलतानसिंह ने १९६२-६३ में मेजर जनरल की हैसियत से वियतनाम में पांच देशो की सेंनाओ का संयुक्त रास्ट्रके अधीन नेतृत्व किया एवं इस सराहनीय कार्य के लिये संयुक्त रास्ट्र मैडल प्राप्त किया। अपने कार्यकाल के दौरान फील्ड मार्शल एस.एच.एफ. मानिकशा के साथ लम्बे अरसे तक कार्य किया एवं चार आरटिलरी ब्रिगेडो का कुशल नेतृत्व किया।
जुलाई-१९६५ में सेवानिवृत होने के पश्चात वे पदमपुर में अपने फार्म पर आकर बस गये। समय-समय पर इलाके वासियो का विभिन्न क्षेत्रो में मार्गदर्शन उन्होंने किया एवं उनके जीवनकाल के तजूर्बो का स्थानीय वासियो ने भरपूर लाभ उठाया। पिछले सप्ताह उनका देहावसान हो गया परन्तु उनकी यशकीर्ति अमर है।
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