डूंगरपुर, रावण की लंका में स्थित अशोक वाटिका का वह वृक्ष जिसकी छांव तले बैठने तथा इसके फूलों की भीनी महक से देवी सीता के शोक का हरण हुआ, इन दिनों डूंगरपुर जिले में भी अपनी मोहक आभा बिखेरने लगा है। सीता-अशोक (सराका इण्डिका) नामक यह दुर्लभ वृक्ष शहर के पर्यावरण प्रेमी वीरेन्द्रसिंह बेडसा के निवास पर एक गमले में ही पुष्पित हुआ है। गत चार वर्षों पूर्व रोपे गए मात्रा ढाई-तीन फीट ऊॅंचाई के इस पौधे पर खिले शानदार फूलों को देखकर न केवल बेडसा अपितु पर्यावरणप्रेमियों की खुशी का भी ठिकाना नही रहा। इस पौधे पर नारंगी-लाल रंगों की फूलों की आभा देखते ही बन रही है। उल्लेखनीय है कि भारतीय धर्म, संस्कृति व साहित्य में प्रमुख स्थान प्राप्त इसी अशोक वृक्ष के तले ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और भगवान महावीर स्वामी को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। प्रचलित मान्यताओं अनुसार चत्रा शुला अष्टमी के दिन अशोक वाटिका में इसी वृक्ष के नीचे हनुमानजी के हाथों भगवान राम का संदेश व मुद्रिका (अंगूठी) प्राप्त हुई थी। इन्ही मान्यताओं के कारण अशोकाष्टमी के दिन महिलाएं इसका पूजन कर सौभाग्य की कामना करती है। कामदेव के बाणों में एक बाण इसका पुष्प भी है अतः इसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसके पुष्प, पत्तियों, छाल व फलों का उपयोग कई प्रकार की औषधियों के रूप में होता है।