डूंगरपुर, विदेशी भाषाओं के साहित्य को जनसामान्य तक उन्हीं की जुबान में सुलभ कराने के एक
प्रयास के तहत राजस्थान के दक्षिणांचल वागड के साहित्यकारों ने १३ विदेशी कहानियों का राजस्थानी में अनुवाद करते हुए पुस्तक का स्वरूप प्रदान किया है। इस उदात्त प्रयास के सूत्राधार बने है वागडी साहित्यकार उपेन्द्र अणु। अणु के संपादकत्व में हाल ही निधि प्रकाशन उदयपुर के तत्वावधान में ’आंगास बणता सबद‘ पुस्तक का प्रकाशन किया गया है जिसका शीघ्र ही विमोचन किया जाएगा। षभदेव कस्बे के मूल निवासी उपेन्द्र अणु के साथ इस प्रयास में वागड अंचल के जगमालसिंह सिसोदिया, देवीलाल जानी, सतीश आचार्य, घनश्याम प्यासा, दिनेश पंचाल, महेश देव भट्ट, दीपिका दीक्षित, मयंक मीत, निर्मल जानी, सुरेश सरगम,भविष्यदत्त भविष्य व छत्रापाल शिवाजी ने कहानियों का अनुवाद किया है। इस कहानी संग्रह में रूसी कथाकार व नाटककार अेन्तोन पाबलेविच चेखव, अमेरिका के लिओ तालस्तॉय, अर्नेस्ट हेमिग्वे, इग्लेण्ड के थामस हार्डी, फ्रांस के गाइ द मापासां, डेनमार्क के हेंस क्रिस्चियन, अेण्डरसन, न्यूजीलेण्ड कैथरिन मेन्सफिल्ड और आयरलेण्ड के ऑस्कर वाईल्ड की कहानियों का अनुवाद किया गया है। उल्लेखनीय है कि वागडी के श्रेष्ठतम कवि, गीतकार उपेन्द्र अणु ने साहित्य अकादमी नई दिल्ली तथा राजस्थानी भाषा साहित्य और संस्कृति अकादमी बकानेर से धूमिल की काव्य कृति ’कल सुनना मुझे‘ के वागडी अनुवाद ’काले सांभरजू म्हने‘ पर अनुवाद पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। इससे पूर्व अणु की ’बीती ताहि बिसारिये‘, ’संघर्ष‘, ’चंपा की नादानी‘ तथा नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तिका ’वीरवर कल्ला राठौड‘ भी प्रकाशित हो चुकी है तथा वागडी काव्य संग्रह ’मनख नू मान‘ , एकांकी संग्रह ’भणेलो के गणेलो‘ तथा सिंधी कहानियों का राजस्थानी अनुवाद प्रकाशनाधीन है।