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| 21 November 2008 |
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तीन वर्ष की आयु खेलने -कूदने की होती है। उसी आयु वर्ग में सुजान देसर निवासी कन्हैया लाल की पुत्री कुमारी मोनिका पंवार को माचिस संग्रह करने का जुनून संवार हो गया मात्र २-३ वर्ष की आयु में इन्ही माचिस की खाली डिब्बयों के साथ खेलने के रूप में शुरू हुआ था । जो कि उसकी मम्मी द्वारा अपने घरेलू कामकाज का निपटानें के समय उसे खेलने में व्यस्त रहने के लिए दी जाती थी । १३ वर्ष की उम्र और उसके पास १२५० से ज्यादा माचिसों का अदभूत ऐसी डिब्बयों का संग्रह जो हर किसी को ढुंढने से भी नही मिलती । श्रीरामसर, बीकानेर श्री गणेश बाल विद्यानिकेतन, की कक्षा ९ की छात्रा कु. मोनिका पंवार को बाद में शौक धीरे - धीरे ऐसा बढने लगा कि उसकी मां सरोज ढेरो खाली माचिसो से परेशान होने लगी पर मोनिका के पिता कन्हैया लाल पंवार ने अपनी पुत्री के शौक में पुरा साथ दिया जो कि रेल्वे के डी.आर.एम. ऑफिस की भंडार शाखा में लिपिक के पद पर कार्यरत है। और फिर उन्ही खाली माचिसो में से अलग - अलग छाप वाली माचिसो की छंटाई करने के काम में मोनिका की छोटी बहन सोनिका व टीनु एवं छोटे भाई राज भी उसकी पुरी मदद करते है। व उनको माचिस देखने पर ही पता चल जाता है कि यह माचिस संग्रह में है या नही तथा यह भी बता देते है कि कौन सी फाईल में लगी है। मोनिका के खाली माचिसो के अलग-अलग ब्रांड इक्ट्टा करने के शौक ने अब उसके पास १२२१ से अधिक माचिसो का कलैक्शन बना दिया है। यह संग्र्रह बीकानेर के अलावा भारत के विभिन्न शहर जयपुर, जोधपुर, चुरु, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ, जैसलमेरद्व बाडमेर, अजमेर, दिल्ली हरिद्वार, अमृतसर श्री नगर आदि स्थानों के धार्मिक स्थलों से प्राप्त किये गये है।
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