शरद टाक
मेडतासिटी। मीरा महोत्सव के उपलक्ष्य में मीरा शोध संस्थान तथा मीरा साहित्य, संस्कृति एवं कला संस्थान के तत्वावधान में मीरा व्याख्यानमाला का आयोजन शनिवार शाम को मरूधर डिफेंस सीनियर सैकण्डरी स्कूल में वरिष्ठ साहित्यकार मूलराज व्यास के मुख्य आतिथ्य में एवं कशनसिंह चांपावत की अध्यक्षता में कया गया। कार्यककम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इस मौके पर श्रीमती शांति गौड ने मीरा बाई के पद सुनाकर तथा मीरा बाई के भजनों की प्रस्तुति देकर श्रैताओं को भावविभोर कर दिया। मीरा शोध संस्थान के महामंत्री वरिष्ठ साहित्यकार दीपचंद सुथार ने अपने वक्तव्य में संस्थान की उपलब्धियां एवं भावी योजनाओं की जानकारी दी। मीरा राजस्थानी मंच के अध्यक्ष कालू खां ने मीरा के जीवन से शिक्षा लेने व चरित्र निर्माण करने की बात कहते हए बताया क मीरा की दृढता, धर्म और धैर्य और सहिष्णुता आज की महन्ती आवश्यकता है। मंच के सचिव दशरथसिंह खिडिया ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को मीरा बाई के जीवनवृत की जानकारी दी। तथा भारतीय संस्कृति व समाज को मीरा के योगदान की महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत की। बी. के. व्यास सागर ने अपने उद्बोधन में मीरा की मेडता नगरी को अभूतपूर्व देने पर प्रकाश डाला। देश-विदेश में मीरा की लोकप्रियता के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत की। कार्यककम अध्यक्ष चांपावत ने मीरा बाई के जीवन वृत्त से संबंधित जानकारियां प्रस्तुत करते हुए आगन्तुक साहित्यकारों, विद्वानों व श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए कार्यककम समापन की घोषणा की। मंच का संचालन बी. के. व्यास सागर ने कया।