जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रेरणा से राजस्थान में चलाए जा रहे ‘हरित राजस्थान अभियान’ के तहत डूंगरपुर जिला प्रशासन जिले भर में फैली बंजर पहाडियों की हरितिमा लौटाने के लिए प्रयास कर रहा है और इसी के तहत 12 अगस्त बुधवार को एक साथ छह लाख पौधारोपण करते हुए एक अनूठा कीर्तिमान बनाने की दिशा में प्रयासरत है। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रामलाल जाट ने नई दिल्ली में बताया कि हरित राजस्थान अभियान के तहत डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायत गडा मोरैया के खेमारू गांव में बुधवार को आयोजित होने वाला सघन पौधारोपण एक इतिहास का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री गहलोत बुधवार को इस पौधरोपण कार्यक्रम का अवलोकन करेंगे। इस अवसर पर जाट एवं जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालविया भी मौजूद रहेंगे। जाट बताया कि डगरपुर जिला प्रशासन द्वारा पौधरोपण के लिए तैयार की गई योजना के अनुसार कि 300 व्यक्तियों की टीम इस कार्य को 12 घण्टों की अवधि में अंजाम देगी।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने 16 जुलाई 2009 को पांच लाख 41 हजार 176 पौधों को रोपते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराया था । इससे पहले भारत में ही 12-13 जून 2009 को चार लाख 47 हजार 874 पौधे लगाकर रिकार्ड कायम किया गया था। डूंगरपुर जिले के खेमारू गांव में बंजर और विभिन्न प्रकार की भूमि वाले कुल 125 हेक्टर परिक्षेत्र में से 65 हेक्टर में वन विभाग के तकनीकी निर्देशन में सघन पौधरोपण किया जाएगा। पौधरोपण के उपरान्त पौधों के संरक्षण के लिए विशेष ध्यान दिया जायेगा और पौधों की सुरक्षा के लिए बाड, थावलों का निर्माण, पानी की आपूर्ति, चौकीदारी, ट्रेंच इत्यादि 6 कार्यों के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनान्तर्गत अब तक 1.80 करोड रूपयों की स्वीकृति जारी की गई है। मौके पर थूअर की बाड लगाने, 20 चौकीदारों की नियुक्ति, 6 ट्यूबवेलों की स्थापना तथा वाटरशेड तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के पूर्व में निर्मित 12 स्वयं सहायता समूहों को पुनर्जीवित करते हुए पौध संरक्षण कार्य सौंपे जाने के लिए प्रशासन द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी वर्षों में पौधों की आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने खेमारू गांव में मातृ पौधशाला विकास का एक मेगा प्रोजेक्ट भी हाथ में लिया है। डूंगरपुर जिला प्रशासन इस प्रोजेक्ट के माध्यम से जिले की पहाडियों की खो चुकी हरितिमा को लौटाते हुए वागड अंचल की जैव विविधता का संरक्षण तथा क्षेत्रवासियों को वन उपज के माध्यम से आजीविका का माध्यम मुहैया करवाएगा। यहां पर विकसित होने वाली पौधशाला से पूरे जिले में पौधों की सप्लाई होगी । सघन पौधरोपण उपरान्त क्षेत्र को विभिन्न भागों में विभक्त करते क्षेत्रवासियों को संरक्षण की जिम्मेदारी दी जाएगी और इससे क्षेत्रवासियों में ‘मेरा क्षेत्र, मेरा पौधा’ की भावना के विकास के साथ ही रोपित पौध के संरक्षण का उद्देश्य सफल होगा। इसके लिए ग्राम सभा के आयोजन के साथ जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए ग्रामीणों को संकल्प भी दिलवाया गया है।