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हनुमानगढ व गंगानगर के चित्रकारों के चित्रों की धूम जयपुर में
11 Nov 2008

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Pelagian e-Dictionary: Hindi to English and Enlgish Dictionary width=

हनुमानगढ, दृश्यकला के सृजन धर्मियों की संस्था टूम-10 की ओर से जयपुर के जवाहर कला केन्द्र की सुदर्शन कला दीर्घा में हनुमानगढ व श्री गंगानगर के चित्राकारों की प्रदर्शनी द नोटस का आयोजन ७ नवम्बर से किया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार श्री नंद किशोर आचार्य व दूरदर्शन के पूर्व निदेशक एवं साहित्यकार श्री नंद भारद्धाज ने किया। 14 नवम्बर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में कला जगत की अनेक हस्तियों ने शिरकत की।
प्रदर्शनी में नोहर के महेन्द्र प्रताप शर्मा ने 6 पेंटिंग्य में नायिका भेद का अंकन मनमोहक शैली में किया है उनकी पेंटिंग्स में भतेरण, मुग्धा, प्रतीक्षा, उन्मुक्त आकाश, उडान व नवोढा को लोक रूपाकार व पारम्परिक तथा आधुनिक रूपाकार का मिश्रण में प्रस्तुत किया है। ठेट राजस्थानी ग्राम्य जीवन से जुडे ये रूपाकार लोकोन्मुखी आभूषण वस्त्रा व भंगिमा के साथ रेखांकित होते हैं तो कैनवास पर परम्परागत भारतीय रंग हिरमिच का स्पर्श सुकून देता है।
The Notes - Eye catching Exhibition of Artists from Hanumangarh and Sriganganagar श्री गंगानगर के ओम सुथार की 6 कलाकृतियां गति, लय व संतुलन का जीवन्त उदाहरण प्रस्तुत करती है। कैनवास पर तेल रंगो में उभरी गति, अर्जुन, कृष्ण, सूपरगेम व संतुलन नामधारी ये कृतियां बरबस ही दृष्टा को आकर्षित करती है।
प्रदर्शनी में टिब्बी के राजेन्द्र सुथार की कला कृतियों में दलित बस्तियों में रहने वाले बच्चों की मनोवृतियों को चाइल्ड विद काइट के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। कैनवास पर एकरलिक व तल रंगो में कच्ची बस्तियों के बच्चों की पतंग उडाने की चाह का सजीव चित्राण हुआ है तो वहीं हनुमानगढ की मुग्धा सिन्हा की एनीमल फार्म व वाद्य यंत्रा कला कृतियां कागज पर पैन, इंक और रंगों के माध्यम से उभरती है। एनीमल फार्म में चराचर जगत से सकल जीवों की आकृतियां विशेष दृष्टि से उभरती है तो वाद्य यंत्र भारतीय पारम्परिक यंत्रों की संजीव उपस्थिति करवाती है।
साहित्यकार ओम पुरोहित कागद की 5 फ्रेम में जडत 15 कृतियां कागज पर पैन व इंक से उकेरी गई है। इन चित्रों में पुरूष की सत्ता, पुरूष का दंभ, नारी शोषण, नारी की स्वतन्त्राता की चाह, स्त्राी पुरूष के बनते बिगडते सम्बन्ध, तीसरे की उपस्थिति कामान्धता व स्त्री मन की कोमलता को प्रतीकात्मकता व बिम्बात्मकता के साथ उकेरा गया है। प्रयोगधर्मी चित्रकार व ख्यातनाम चित्राकार श्री राम किशन अडिग (पल्लू) ने दृश्यमान जगत के विरोधाभास, असमानता, ऊंच नीच, आंतरिक छटपटाहट व आर्थिक वर्गो में बटी दुनियां को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा है। अडिग रंगों के खिलाडी के रूप में सामने आते है और बिना आकारों से अमूर्त को मूर्त और मूर्त को अमूर्त बना देते है। निधि सक्सेना की चित्र कृतियां कैनवास पर रंगों के माध्यम से ख्वाबों का ताना बुनती नजर आती है। इस प्रदर्शनी में राम किशन अडिग व निधि सक्सेना का मूर्ति शिल्प भी प्रदर्शित किया गया है।




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